Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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साम की ठंडी हवा
कविता


शाम कि यह ठंडी हवा
जादू की पिटारें के खुलने के जैसा एहसास दिलाता है
दिन भर के थकावट के बावजूद में शाम के वक्त
खुले आसमान के नीचे बैठने का आनंद जन्नत से कम नहीं

जो ठंडी ठंडी हवा जैसे-जैसे गालों को छु
और बालों को उरा जाती है
ऐसा लगता है कि सारे दर्द और शिकायत ही मिट गया हो

इस ठंडी हवा को महसूस करके
और कुछ महसूस ही नहीं होता

और जैसे-जैसे शाम गुजरते जाती है
और रात आती जाती है
वैसे-वैसे आसमान में तारे खील खिलाने लगते हैं
और इस जगमांगते हुए तारे
हीलते हुए पेढ़ पैधो के पत्तियां
चलते हुए हवा सुकून से भर देती है
और इस पल में इंसान को कुछ और नहीं चाहिए

बस छत के दीवारों पर बैठे रहना
अपने पैरों को नीचे करते हुए
इस हवा को महसूस करते हुए
आसमान को देखते रहना
जले हुए धड़कन को ठंडक से भर देती है
और ऐ ठंडक सदीयो के दुआ से कम नहीं है


और मुझे कुछ देर ऐसे ही बैठे रहना है
इन हवाओं के साथ इन लम्हों में सारे गमों को भुलाकर
इन्हें महसूस करते हुए जीते रहना है

थकावटों से निकली हुई दुआओं को
कबूल होते देखते रहना है
और महसूस करना है
इन लम्हों को
और इन पलो में ठहेर जाना है

Hindi Poem by AbhiNisha : 112024340
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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