मैं कहना चाहती हूं
कविता
मेरा दुनिया इस दुनिया से अलग है
और मेरी कहानी उसी दुनिया से आती है
जो मेरी दुनिया है
खामोशियों से पलते हुए
ख्वाबों में जीते हुए
अंन देखा एहसास के साथ
जहां मुलाकात नहीं होती
कोई बात नहीं होती
फिर भी कहानी होती है
उन दिनों की जो बीत गए
उन दिनों की जो कभी आए ही नहीं
उन दिनों की जो कभी आ भी नहीं सकता
उन दिनों की जिसे कलपना में ही जीया जा सकता है
हकीकत में दूर-दूर इसका कोई वास्ता नहीं
पर वह कल्पना भी हकीकत होते हैं
उन सब की दिलों की जो दर्द खा कर
अपने हॉठ सील लेते हैं
बताना मुश्किल है और छुपाना आसान
पर मैं केहना चाहती हूं
जो मेरे दिल में है
छुपाने की जगह
इन सारे जज्बातों को लिख देना चाहती हूं
जो कभी सुनी नहीं गई
जो कभी जाहिर नहीं हुई
वो मेरा दर्द है
और मेरे जैसे हजारों व्यक्ति की
जिसने कभी जाहिर ही नहीं किया
और आखिरी सांस तक बस जीते रहे
जिंदा लाश बनकर
सांस लेते हुए बस चलते रहे
उन सफर पर जिन्हें हमेशा दूसरों ने तय किया
पर मैं चलते रहने के साथ-साथ
खुद अपना सफर चुनना चाहती हूं
चाहे फिर मुझे बाद में पछतावा ही क्यों ना हो
उस सफल पर चलने की
जो मैंने खुद तय किया
पर तसल्ली होगी
कि मैं बस चलते रहने से अच्छा
मैं ने चलने का रहा का चुनाव किया
शायद मुझे देखकर
कोई और भी
अपने खामोशियों से थक जाए
और बोल उठे जी उठे
और अपने रहा ढूंढने के लिए अपने कदमे को आगे बढ़ा ले
शायद कोई बस जीते ना रहे