मैं और मेरे अह्सास
महक जिन्दगी में घुली जा रही हैं
प्यार की महक जिन्दगी में घुली जा रही हैं l
तब से चैन और सुकून की साँस पा रही हैं ll
खुशनुमा सुबह में चारो ओर खूबसूरती छाई l
आज बहारों की मल्लिका रंगत ला रही हैं ll
पहेले प्यार की पहली धड़कने बेकाबू हुई कि l
कहीं से बयारों के साथ सदाएं आ रही हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह