मैं और मेरे अह्सास
ग़ज़ब ही करेगी नजर धीरे धीरे l
ग़ज़ब ही करेगी नजर धीरे धीरे l
मोहब्बत करेगी असर धीरे धीरे ll
हौसलों को बनाये रखना सदा l
जिंदगी होगी बसर धीरे धीरे ll
मंजिल की ओर आगे बढ़ता जा l
सुहाना होगा सफ़र धीरे धीरे ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह