मैं और मेरे अह्सास
बागबां
बागबां की तरह इबादत करनी चाहिए l
जिन्दगी शज़र पे इनायत करनी चाहिए ll
आशा का दीपक दिल में जलाये रखिये l
रिश्ता बनाये रखने बात करनी चाहिए ll
कल से आज को बहतरीन बनाकर अब l
खूबसूरत सी क़ायनात करनी चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह