क्यों आता है साथ देने कोई
जीवन के विस्तार में,
जब रहना ही है हम सबको
आखिरकार इंतज़ार में...
क्यों मिलते हैं कुछ लोग
रास्तों के बीचोंबीच,
जब उनकी मंज़िल
हमारी मंज़िल नहीं होती?
क्यों थाम लेता है कोई हाथ
इतने विश्वास से,
जब एक दिन
उसी हाथ की गर्माहट
स्मृति बन जानी होती है?
क्यों बो देता है कोई
मन की मिट्टी में अपनत्व के बीज,
जब ऋतु बदलते ही
वही वृक्ष सूख जाना होता है?
शायद इसलिए कि मनुष्य
उम्मीद से बना है,
और प्रेम...
प्रेम वह भ्रम है
जिसे जानते हुए भी
हर हृदय सच मान लेना चाहता है।
हम प्रतीक्षा करते हैं
किसी आवाज़ की,
किसी संदेश की,
किसी लौट आने वाले कदम की,
और धीरे-धीरे
इंतज़ार हमारे भीतर
घर बनाता चला जाता है।
फिर एक समय ऐसा आता है
जब हम व्यक्ति का नहीं,
उस संभावना का इंतज़ार करते हैं
जो कभी पूरी नहीं होनी।
रातें बीत जाती हैं,
मौसम बदल जाते हैं,
चेहरे बदल जाते हैं,
पर कुछ प्रतीक्षाएँ
घड़ी की सुइयों से नहीं,
आत्मा की धड़कनों से मापी जाती हैं।
और सबसे गहरा दुःख यह नहीं कि
कोई लौटकर नहीं आया,
दुःख यह है कि
हमने लौटने की उम्मीद
कभी मरने नहीं दी।
हमने सूने दरवाज़ों पर
आहटें सुनीं,
खाली आकाश में
नाम लिखे,
और हर विदा में
एक नई वापसी खोजते रहे।
क्यों आता है साथ देने कोई
जीवन के विस्तार में,
जब रहना ही है हम सबको
आखिरकार इंतज़ार में...
शायद इसलिए कि प्रेम
मिलन से नहीं,
प्रतीक्षा से अपना सबसे गहरा अर्थ पाता है।
और कुछ लोग
हमारी ज़िंदगी में रहने के लिए नहीं,
बस हमें इंतज़ार का अर्थ सिखाने आते हैं।
एक उम्र गँवाई है हमने इंतज़ार में...॥🍂🍁🩷