*"बदलते वक़्त का चेहरा"*
जो कहता था, "वक़्त आए तो भी कभी न बदलूंगा मैं"
वक़्त के करवट लेते ही, सबसे पहले बदलते उसे देखा मैंने...
जो लम्हा भी जुदाई न सहता था कभी,
वही दूरी के बहाने ढूँढते देखा उसे मैंने...
उसे मालूम था, उसके बिना ख़ाक हो जाऊँगी मैं,
फिर भी मेरे जज़्बातों का सौदा करते देखा उसे मैंने...
मैं तो टूट कर बिखरी उसकी जुदाई में,
और महफ़िल में यारों के, जाम-ए-जश्न पीते देखा उसे मैंने...
प्राची तंवर ……