किसी रोज़ तुमसे मिलकर
यूँ बिछड़ जायेंगे
जैसे घाटों को छूकर लहरें गुज़र जाती हैं
कुछ अधूरी-सी बातें
आँखों में रह जायेंगी
जैसे कुछ दास्तानें ख़ामोशियों में उतर जाती हैं
न तुम रोक पाओगे,
न हम ठहर पाएंगे
वक़्त के हाथों दोनों ही बिखर जाएंगे
मगर एक शाम
जब तन्हाई दस्तक देगी।
तुम किनारा बने रहना
हम लहरों की तरह तुम तक उमड़ आयेंगे
मिलना भी मुकद्दर होगा और बिछड़ना भी
तुम्हारे ख्वाबों में इस तरह बिखर जाएंगे
बस एक ख़ामोश सा एहसास दिल में ठहर जाएगा
तुम देखते रह जाओगे किनारे की तरह वहीं
और मेरा नाम लहरों संग
बहता चला जाएगा✍️