मैं और मेरे अह्सास
आसमान
जीने के लिए एक मुट्ठी आसमान चाहिए l
कलि को खिलने के लिए बागबान चाहिए ll
प्यार मोहब्बत तो बच्चों का खेल नहीं है l
हुस्न का दिल जीतने को आहवान चाहिए ll
पैसे की बोलबाला इंसान की किमत नहीं l
आज कल सब को बड़ा खानदान चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह