मैं और मेरे अह्सास
बधाई हो बधाई
बधाई हो बधाई विरा शज़र पर बहार आई l
खुशीयों के मारे बयार ने शहनाई बजाई ll
चौतरफ फ़िज़ाओं में खुशनुमा खुशबु फेला l
उपवन में रंगबिरंगी फूलों से डाली सजाई ll
हवाएँ भी रंगीन मिजाज की होती है कि l
कायनात में चारो ओर की खुशबु लाई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह