मैं और मेरे अह्सास
बरसात में
बरसात में इश्क़ वालों के हौसले बढ़ जाते हैं l
हुस्न वाले निगाहों से मोहब्बत पढ़ जाते हैं ll
मौसम की या इश्क़ की इंतिहा ही कहो कि l
बादलों के पार पहुँचने ऊपर चढ़ जाते हैं ll
आहलदायक नशीले से माहौल में दौनों ही l
बारिस में भिगकर भिगोकर सज जाते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह