—तन्हाइयों का अंत—
रहे लिए हो तन्हा तो अब लौट आओ,
ये शिकवे-शिकायत तुम्हारे अब भूल जाओ।
तरसाओ ना इस दिल को यूँ इंतज़ार में,
आओ मिलकर हमसे ये दूरियाँ मिटाओ।
अधूरा है तुम्हारे बिना हमारा ये जहाँ,
आकर तुम इसे फिर से मुकम्मल बनाओ।
तन्हाइयों के इन अंधेरों को कर दो खत्म,
और हमारी मोहब्बत को रोशन बनाओ।
- MASHAALLHA