उसने कहा भूल जाओ मुझे,
जैसे कोई लफ्ज़ हो किताब का।
हमने तो उसे जिंदगी समझा था,
और उसने हमें एक ख्वाब समझ कर मिटा दिया।
2. टूट कर चाहा था जिसे, उसी ने तोड़ दिया।
जिसे अपना खुदा बनाया था,
उसी ने गैर बना दिया।
3. हँसता हूँ ज़ख्मों पर मैं अब, क्योंकि रोने से कोई आता नहीं।
दर्द की तो आदत सी हो गई है,
अब किसी बात से दिल दुखता नहीं।
4. वो खुश है किसी और के साथ, हम आज भी उसी की राह देखते हैं।
उसे तो नया प्यार मिल गया,
हम आज भी उसी के लिए खुद से लड़ते हैं।
5. मेरी मोहब्बत की बस इतनी सी कहानी रही, मैं टूटता रहा और वो बेगानी रही।
मैं उसे खुदा से मांगता रहा,
और वो किसी और की दीवानी रही।
- Mawaskar Pratigya