कैसी अब मजबूरी रहने लगी है,
थोड़ी-थोड़ी अब दूरी रहने लगी है।
पहले हर बात पे होती थी बातें दिल की,
अब तो खामोशी भी ज़रूरी रहने लगी है।
वो जो हर रोज़ मेरी राह तका करते थे,
उनकी आँखों में भी अब बेनूरी रहने लगी है।
हमने चाहा था जिसे अपनी मोहब्बत की तरह,
उसकी चाहत भी अब अधूरी रहने लगी है।
जिसे अपना समझा था उम्र भर के लिए हमने,
उसी से मिलने में अब मजबूरी रहने लगी है।
जाने किस मोड़ पे आकर ये मोहब्बत बदली,
दिल में चाहत है मगर मोहब्बत बुरी रहने लगी है।
✍️बेनी सागर