अकेला पन
सबकी अपनी कहानी है,
पर सुनने वाला तो नहीं,
सुनने वाला है तो कहने वाला नहीं,
बात गहरी है।
कभी सोचा है, जो कहते हैं हम तो,
अकेले अच्छे हैं,
उन्हें हमारी भाषा में,
कल खुरा कहते हैं,
अकेले रहना बुरा नहीं,
पर ये ज़्यादा अच्छा भी नहीं,
हम यूं ही नहीं कह रहे,
पर एक दुनिया कहीं हमने छोड़ दी,
अब कोई इतनी बात नहीं करता,
अब कोई मित्र नहीं बनाता।।
ऐसे ही बात नहीं करती,
खुद एक उदाहरण हूँ,
यूं ही मुलाकात नहीं करती,
मुलाकात करती हूँ, अपनी बातों से,
उन यादों से जो अब बनायी हैं,
नई कहानियों से,
नये मित्रों और किरदारों से।