हार मत मान, ऐ मुसाफिर,
अंधेरों से डरना छोड़ दे।
तू सूरज सा चमकने वाला है,
खुद को तपाना छोड़ मत दे।
जो राहों में बिछे हैं कांटे,
उन्हें ही अपनी ताकत बना ले।
गिरेगा तू कई बार यहाँ,
पर हर बार उठकर मुस्कुरा ले।
आँधियों को ज़रा ये बता दे,
तेरे हौसलों में बहुत जान है।
मंज़िल पाना तो बस एक पड़ाव है,
तुझे तो छूना पूरा आसमान है।
रख यकीन अपनी काबिलियत पर,
वक्त का ये पहिया भी घूमेगा।
तेरी मेहनत रंग लाएगी एक दिन,
कामयाबी का ताज़ तेरे कदम चूमेगा।
- Shubhra Dubey