मां क्या होती है,
मुझसे मत पूछो,,
मां ना होती तो,,
जिंदगी ही मेरी जिन्दगी कहां होती....
मां ना होती तो,,
ये बगिया न खिली होती,
ये गुलशन न सजा होता,
इसमें मुस्कुराती बहार न होती......
तेरी साड़ी का वो कोना
जिसे पकड़ कर चलना सीखा मैंने,
आंचल की वो छत्र छाया
गोल बिंदी की वो दमक
गर तेरी प्यार भरी डांट न होती
तो मैं इस मुकाम पर ना होती....
पहली बार जब होठ बुदबुदाये थे,
आंखों ने जब चिलमन उठाए थे,
अबोध मन मेरा जग से जब अनजान था
पर तेरा स्पर्श ,,, मैं खिलखिला उठी थी....
वात्सलय और प्रेम की सूरत थी तू
ममता की साक्षात मूरत थी तू
अपने तो छोड़ो,, गैरों से भी लगाव
धरती पर मानो देवी की पूरक थी तू.....
चली गई वहां ,,
जहां से कोई लौट कर ना आया है
मां की कमी भला कौन भर पाया है,
अपना आशीर्वाद सदा हम पर बनाए रखना
अपनी इस फुलवारी को यूं ही सजाए रखना।
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धन्यवाद - शिल्पी गुप्ता 🙏🙏✍️✍️