डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
जल्दबाजी
मुझे बहुत जल्दबाजी रहती है
सब काम करने की,
किसी भी कार्य का तनाव
सहन नहीं कर पाती।
कल पर टालना भी
अच्छा नहीं लगता,
त्वरित प्रतिक्रिया देना
मेरा दोष है।
पर सोचती हूँ,
मरने में भी कहीं
जल्दबाजी की मैंने,
तो कई काम छूट जाएंगे करने से,
कुछ रूठ जाएंगे।
क्या ईश्वर देंगे
अनुमति मुझे,
रुके हुए कार्य
पूर्ण करने की?
गिनती की सांसें हैं,
जिम्मेदारियां अधिक,
और पूरे करने हैं
कुछ सपने।
जिम्मेदारियों और कर्तव्य के बीच
थोड़ा समय निकालती हूँ
अपने सपनों के लिए,
शायद इसीलिए
हड़बड़ी करती रहती हूँ कि
कोई अपना न छूट जाए,
कोई सपना न टूट जाए।
सबकी आस लगी होती है,
किसी की आस न टूट जाए,
दूसरों के आंसू पोंछते
खुद के गम भूल जाती हूँ।
कोई मुस्कराए मेरी वजह से,
बस इतना ही तो चाहती हूँ।
बस यही दोष है मेरा
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली
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