क्षमा कीजिए, यह कहानी मैंने पहले ओड़िया में लिखी थी, इसलिए आप सभी इसे समझ नहीं पाए। अब उसी कहानी का हिंदी अनुवाद आपके सामने है। आशा है, इस बार यह कहानी आपके दिल तक ज़रूर पहुँचेगी। 🤍
एक गाँव के नदी किनारे एक गरीब लड़की रहती थी—काशपुष्प (कांशतंडी)। सरल चेहरा और शांत स्वभाव वाली वह लड़की एक दिन राजकुमार शरद की नज़रों में आ गई।
धीरे-धीरे नदी किनारे दोनों की मुलाकात होने लगी। कोई बड़ा वादा नहीं था, बस दोनों के बीच एक सरल-सा प्रेम पनप रहा था।
लेकिन राजा ने इस संबंध को स्वीकार नहीं किया। शरद को राजमहल ले जाया गया और काशपुष्प को उसी नदी किनारे मार दिया गया।
कहा जाता है, जाने से पहले काशपुष्प ने कहा था—
“हर साल शरद ऋतु आने पर, मैं इसी नदी किनारे तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।”
कुछ दिनों बाद, काशपुष्प को खोकर शरद ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
आज भी लोग कहते हैं, बारिश खत्म होकर जब शरद ऋतु आती है, तो नदी किनारे खिलने वाले सफेद काशपुष्प (कांशतंडी) काशपुष्प के उसी इंतज़ार का प्रतीक हैं। 🌾🤍
~अनामिका ✍️