योगिनी - क्षणिका
शनै शनै..,
विचारधारा बहे
क्षण-क्षण..,
कल्पना भटके
क्षणभंगुर जीवन में
नश्वर श्वास तक ,
आरंभ से अंत तक
ठोस संकल्प से ,
आत्म ज्ञान की पुकार से
शून्य, मौन, एकांत में
हृदय से ,
वो प्रेम योगिनी..,
ध्यान धरे समाधि जैसा ,
मन से वो
अत्यंत चंचल...,
पर, नियंत्रण करें ऋषियों जैसा ,
तन से वो
पूर्णतः शुद्ध ..,
समर्पण करें गंगा जैसा ।।
©®- शेखर खराड़ी
तिथि -५-१०-२०२६