विश्व डाक दिवस।।
अक्तूबर 09 ...!
एक दौर था, जब पोस्ट ऑफिस का अर्थ ही पोस्ट कार्ड और मनी ऑर्डर था जिसे देखकर लोगों के चेहरे पर ख़ुशी की झलक आ जाती थी।
समय बदला और इनके मायने बदल गए, आज के समय में पोस्ट ऑफिस की कई सुविधाएँ आधुनिक तकनीक की भेंट चढ़ गई।
भले ही हम आज आधुनिक हो गए हैं, आपसी रिश्तों में, संपर्क में पहले से कहीं ज़्यादा क़रीब हो गए हैं, बहुत सी बातों में सुविधजनक हो गए हैं।
लेकिन क्या. . . .
हम उन अहसासों को कभी जी पाते हैं, जो कभी एक पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र या एक मनीऑर्डर के आने से मन में पनप जाते थे। एक गाँव या क़स्बे का डाकिया भले ही हमारा अपना नहीं होता था, लेकिन फिर भी सबका सांझा होता था; जिसके आने से भर से उम्मीदें जाग जाती थी।
आज के डिजिटल दौर में भले ही वह सब नहीं है, लेकिन 'पोस्ट ऑफिस' की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। आज 'भारतीय डाक' सिर्फ़ पत्र का जरिया न रहकर बैंकिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं जैसी अन्य नागरिक सेवाओं की पहचान बन चुका है।
आज, विश्व डाक दिवस के अवसर पर अपनों को करीब लाने और रिश्तों को मजबूती देने वाले डाक विभाग में कार्यरत भाई-बहनों सहित सभी को विश्व डाक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।।
. . . वीर।।