मेरे ख्याल दुनिया को काफ़ी बड़ी वाली टोपी पहनाई गई है। उस टोपी का नाम है स्त्री... पुरुष... मेरे हिसाब से इन दोनों में कोई फर्क नहीं या फिर ऐसा कहना सही होगा की वे दोनों एक है। ये शायद दुनिया को चलाने के लिए सबसे बड़ा झूठ होगा।जहाँ दोनों एक दूसरे को गिरा कर खुद को गिरा रहे है। जब पुरुष पूरी तरह से भावनाओं भर जायेगा तब वह स्त्री बन जाएगा और जब स्त्री अपनी अपनी सारी भावनाओं को खो देगी तब वह पुरुष बन जाएगी। बेवकूफ़ है वे लोग जो इन दोनों को अलग समझते है या फिर अनजान बन रहे है।