सुनो बोलना बहुत कुछ था तुमसे
पर लगता है अब बोल नही पाऊंगी
जो राज कुछ सीने में दफ़न हुए थे
उन पर से पर्दा अब उठा नही पाऊंगी
बेवजह आंखों में जो नमी ठहरे थे
तुम्हारी याद आने पर झट से उन्हें मिटा नहीं पाऊंगी
हां , चांद आसमां में जो अधूरा और अकेला था
शायद उसका किस्सा सबको अब सुना नही पाऊंगी........
- Manshi K