मन और बुद्धि की भी कभी जन्मोंत्री मिला लेंना
जिसके गुण न मिले उससे जल्द बिदा ले लेना
सिर्फ रकीबों को ही नहीं कभी हबीबो को भी आज़मा लेना
दुश्मन अगर खानदान निकले तो पहले उसे मना लेना
कभी कभी खा जाओ उसे,जो सर ऊंचा रखना हो तो
मुंडी नीचे रख के खाने से, ज़्यादा अच्छा है ठोकरें खा लेना
दूध में मक्खन है,पर वह चाबुक से नहीं निकाला जाता
मथनी ढूंढो यारों, जहां जो रस्म चले उसे आज़मा लेना
सिर्फ इश्क में नहीं,अनदेखी में,नफ़रत में भी प्यार होता है
बिना बरसात,बिना बादल,आता नहीं बिजली को गरज लेना
जेब अगर भर जाए तो,सीना तान लेती है,पर दिल पे बोझ देती हैं
अपनी सेहत के वास्ते भी अपने दोस्तों से पेहरन बदल लेना
बहुत सोचने को मजबूर कर दे जेठा,ऐसी ख्वाहिशों से गुरेज अच्छा
जंजीर बांध कर दौड़ में धकेल दे ऐसी पहेली से पहले से मुंह मोड़ लेना