*मोहब्बत से बेहतर क्यों हो जाती है शराब*
मोहब्बत ने वादे दिए थे उम्र भर के,
शराब ने बस एक रात का सहारा दिया।
वो हर सवाल पर ख़ामोश रही,
इसने हर दर्द को बोलने का हौसला दिया।
मोहब्बत ने हमें खुद से दूर किया,
कभी शक में, कभी उम्मीद में उलझाया।
शराब ने आईना थमाया हाथों में,
कहा— टूटे हो, तो हो… कम से कम झूठ नहीं बनाया।
मोहब्बत में हर आंसू का हिसाब था,
किस दिन रोए, किस बात पर।
शराब ने बस इतना कहा—
रो लो आज, कल की फ़िक्र छोड़ कर।
मोहब्बत ने सिखाया इंतज़ार करना,
बिन आवाज़ के तड़पना।
शराब ने सिखाया भूल जाना,
कम से कम रात भर चैन से सो जाना।
वो बदलती रही हालात के साथ,
इसका मिज़ाज कभी बदला नहीं।
मोहब्बत ने हर बार छोड़ा बीच रास्ते,
शराब ने कभी साथ छोड़ा नहीं।
इसलिए लोग कहते हैं—
मोहब्बत से बेहतर हो जाती है शराब,
क्योंकि मोहब्बत ज़ख़्म देती है उम्र भर का,
और शराब… बस थोड़ी देर का जवाब।
आर्यमौलिक