हमारे देश के लाल
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कितनी महान होगी वो ममता,
जिसने अपने जिगर के टुकड़े को ,
दुसरो के लिए जीना सिखाया।
कितनी दृढ़ होगी पिता की वो सीख,
जिसने अपने लाल को तलवार नहीं ,
दूसरों की ढाल बनना सिखाया।
कितना विशाल होगा वह हृदय,
जिसने ऐसे दिल को स्वीकार किया,
जिसके सीने में हर धड़कन सिर्फ देश के लिए धड़कता है
कितना मजबूत होगा उस बहन का मन,
जिसे यह भी ज्ञात नहीं की अगली बार उसकी राखी,
उसी कलाई पर सजेगी या नहीं।
कितनी सौभाग्य शाली होगी वो गलियाँ वो घर,
जिसके कण- कण में उस देशभक्त की स्मृतियाँ रची- बसी है।
और कितने बिरले है इस माटी के लाल,
जिन्होंने अपने सुख चैन का त्याग,
हमारी चैन की नींद के लिए कर दिया।
____________आकांक्षा श्रीवास्तव