सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)🌟 शीर्षक: हार मानने से पहले
रमेश एक छोटे से गाँव का लड़का था। उसके पिता मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में काम। घर की हालत ऐसी थी कि कई बार रात का खाना भी पूरा नहीं होता था।
स्कूल में रमेश को कोई खास नहीं समझता था। उसके कपड़े पुराने थे, जूते फटे हुए। कुछ बच्चे हँसते हुए कहते—
“इससे कुछ नहीं होगा।”
हर बार ये शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ जाते।
एक दिन परीक्षा का रिज़ल्ट आया। रमेश फिर फेल हो गया। वह स्कूल के पीछे अकेला बैठकर रो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी ज़िंदगी भी उसी रिज़ल्ट की तरह “फेल” हो चुकी है।
घर आकर उसने माँ से कहा,
“अम्मा, मुझसे पढ़ाई नहीं होती। मैं काम करने चला जाऊँगा।”
माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा और धीरे से बोली—
“बेटा, हार वो नहीं जो गिर जाए, हार वो है जो उठना छोड़ दे।”
वही एक वाक्य रमेश की ज़िंदगी का मोड़ बन गया।
अगले दिन से रमेश ने एक नियम बना लिया—
रोज़ सुबह जल्दी उठना, दो घंटे पढ़ाई, और दिन में जो भी समझ न आए, दोबारा कोशिश।
कई बार वह थक जाता, कई बार मन करता छोड़ देने का। लेकिन माँ का वो वाक्य उसे हर बार रोक लेता।
समय बीतता गया। साल बदले।
और वही रमेश, जिसे कभी “बेकार” कहा गया था, आज सरकारी नौकरी में चयनित हो गया।
जिस दिन उसने माँ को सफलता की खबर दी, माँ की आँखों में आँसू थे—खुशी के।
✨ सीख
हालात चाहे जैसे हों, अगर इंसान हार मानने से पहले एक बार और कोशिश कर ले—तो किस्मत भी रास्ता बदल देती है।🌟 सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)
राजु एक साधारण से गाँव में रहने वाला लड़का था। उसके घर में न ज़्यादा पैसे थे, न बड़ी सुविधाएँ। लेकिन उसके पास एक चीज़ बहुत खास थी — सपने देखने की आदत।
जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब राजु पुरानी कॉपियों के खाली पन्नों पर कहानियाँ लिखा करता था।
वह लिखता था—
कभी किसान की पीड़ा,
कभी माँ की ममता,
तो कभी अपने ही संघर्ष की कहानी।
उसका सपना था—
“एक दिन मैं बड़ा लेखक बनूँगा, मेरी कहानियाँ लोगों के दिल तक पहुँचेंगी।”
लेकिन राह आसान नहीं थी।
स्कूल में लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे—
“कहानी लिखने से कोई बड़ा आदमी बनता है क्या?”
घरवाले कहते—
“पहले नौकरी सोचो, ये लिखना-पढ़ना बेकार है।”
कई बार राजु का हौसला टूट जाता।
एक दिन उसने अपनी डायरी बंद करते हुए सोचा—
“शायद वे सही हैं… मुझसे नहीं होगा।”
उसी रात उसने एक किताब पढ़ी, जिसमें लिखा था—
“सपने वो नहीं जो सोते वक्त आएँ, सपने वो हैं जो सोने न दें।”
ये पंक्ति राजु के दिल में उतर गई।
अगले दिन से उसने तय किया—
रोज़ लिखेगा, चाहे कोई पढ़े या नहीं।
रोज़ सीखेगा, चाहे कोई सराहे या नहीं।
वह सुबह जल्दी उठकर लिखता,
दिन में काम करता,
और रात को फिर शब्दों से दोस्ती करता।
उसकी कहानियाँ पहले मोबाइल पर पढ़ी गईं,
फिर सोशल मीडिया पर,
और एक दिन…
एक प्रकाशक की नज़र राजु की लेखनी पर पड़ी।
कुछ समय बाद राजु की पहली किताब छपी।
जब उसने किताब पर अपना नाम देखा —
“लेखक : राजु”
तो उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो आँसू हार के नहीं, सफलता के थे।
आज राजु एक जाना-माना लेखक है।
लेकिन वह आज भी वही बात कहता है—
✨ सीख
अगर सपना सच्चा हो और मेहनत ईमानदार,
तो हालात चाहे जैसे हों,
सफलता रास्ता खुद बना लेती हैFollow the PRB STORY CLUB channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb80wc69MF92VvNWbp1