यह भी प्रार्थना है -
प्रार्थना केवल मंदिरों में घुटनों के बल झुक कर हाथ जोड़ना या कभी साष्टांग प्रणाम करना या प्रसाद और फूलमाला चढ़ाना नहीं होता है . अक्सर इसके बदले हम भगवान् से कुछ माँग भी लेते हैं . सकारात्मक सोच के साथ दूसरों के लिए अच्छा सोचना भी प्रार्थना है .
जब हम किसी दुखी को गले लगाकर उसके दुःख का कारण पूछते हैं या सम्भव हुआ तो दुःख बांटने की कोशिश करते हैं तो यह भी प्रार्थना है .