कोई आहट सी जगे रूह में,
बरस आए मेरे दो नैन…
सावन सा भी न हुआ दिल,
फिर भी बादल गरज उठे कहीं।
जो दस्तक भी दे, तो फर्क पड़े,
मेरे सवाल छुपे हैं खामोशी में…
प्यार की मंज़िल अब भी दूर,
और रास्ते सोए हैं बेहोशी में।
कहीं तो गुज़रता वक्त ठहरे,
नयनों में भरी ये बूंदें कहें—
थोड़ा सा हल्का कर दे दिल को,
जो मेरे चेहरे से चुपचाप बहें…
_Mohiniwrites