✨ वो स्थान कितने सुंदर होते है!
वो स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां बनावटी भव्यता नहीं वास्तविक दिव्यता होती हैं,
जहां भीड़ नहीं होती होते हैं तो बस चंद सभ्य लोग,
जहां प्रकृति खुद में पूर्ण हो साथ न हो भोग,
जहां मनुष्य मनुष्यता का अवलोकन कर सके।
वे स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां सुकून खुद शांति से बैठ सके,
जहां खुद के अस्तित्व का आभास हो सके,
जहां दृश्य और दृष्टा का ज्ञान हो सके,
जहां तथ्यों के साथ प्रकृति का भान हो सके।
वे स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां पैर खुद ठहर जाए, ठहरे हुए पैरों के साथ विचलित विचार भी,
जहां उत्कृष्टा, बोध, सफलता की नई परिभाषा जन्म लेती हो
जहां यात्रा आरंभ हो खुद की खुद तक के लिए
जहां मौन जन्म ले और उसमें विलीनता भी
वे स्थान कितने सुंदर होते है।
- यथार्थ