कभी कभी में सोचती हूँ की ,
हम इंसान इतना क्यों विचार करते है!
कुछ भी तो हमारा नहीं है,
फिर किस बात का अभीमान करते है?
ये मान सम्मान ,रिश्ते-नाते
जिसको है हम अपना समझकर बैठे ,
ये सब हम मरते ही खत्म हो जाएँगे !
ये धन दौलत और सम्पति,
सब वहीं के वंही रह जाएँगे !
पंच तत्व से बना ये शरीर ,
पंच तत्व में ही विलीन हो जाएगा ,
मन और बुद्धि का ये मायावी कपड़ा ,
आत्मा खिच के ले जाएगा !
सुख-दुख , ईर्षा-प्रेम का ये बादल,
पल में बरस जाएगा ,
हमारा हम में कुछ नहीं ,
सब को ऊपर से मिले हिस्से में बँट जाएँगे !😇❤️