कुछ लड़कियाँ कहती हैं—
“हम पर तो हजार लड़के मरते हैं…”
सच बताऊँ…?
मरते नहीं हैं,
तुम उन्हें जगह देती हो।
कोई भी बिना वजह पीछे नहीं पड़ता,
जब तक तुम खुद उसे इशारा न दो,
जब तक तुम अपनी नज़रों से उसे हक़ न दे दो।
जो लड़की अपनी नज़रें झुका कर,
अपनी हद में रहती है—
उस पर कोई उंगली उठाने की हिम्मत नहीं करता।
ये “हम पर मरते हैं” वाला घमंड नहीं,
ये बस तुम्हारी दी हुई इजाज़त होती है।
इज़्ज़त भी हम खुद बनाते हैं,
और गिराते भी हम खुद ही हैं… 💯