एक शाम आऊंगा तुम्हारे घर पर मैं
एक हाथ में गुलदस्ता लेके
तुम्हे कहुंगा की चलो मेरे साथ
रात को तन्हा बैठेंगे ,कुछ बाते करेंगे
कुछ शायरी सुनाऊंगा,ओर में सारी रात तुमको ऐसे देखता रहुगा
ओर चांद चिल्लाता रहेगा ,,की में चांद हु , में चांद हु ,में चांद हु,,,,,,।।।।।।।।।।।।
- Das Vijay