मेरे अल्फ़ाज़ मेरी चाहतों का दर्पण है।
जो जी ना सकूं इस जहान में,
उसे मैं इसके सहारे जीती हूं!
ले सहारा लिख देती हूं सारे अरमान,
सोचती हूं क्या पता कभी तो पढ़ लेंगे इसे मेरे भगवान!
By. Santoshi "Katha"
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