धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है , कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम
आज चल रहे हैं ,तो क्या
कल दौड़ कर भी दिखलाएंगे हम ।
धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
उम्मीद है कि ,यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम ।
आज हारे हैं, तो क्या कल जीतकर भी दिखलाएंगे हम ।धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है ,कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।
आज गम हैं तो क्या कल खुशियों को भी लाएंगे हम धीरे-धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है ,कि यह इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।
आज तन्हा हैं तो क्या कल मेफिलो में भी जाएंगे हम।
धीरे धीरे गिरकर फिर संभल जाएंगे हम
एक उम्मीद है कि ये इम्तिहान भी पार कर जाएंगे हम।