रफ़्ता-रफ़्ता धड़कनें चली जा रही हैं,
उन्हें तो ख़बर ही नहीं
ये क्या धुन गुनगुना रही हैं।
अपनी लट को सँवारती हुई,
वो खुद में ही मुस्कुरा रही हैं।
किसी सरगम की ताल है,
या फिर मोहजाल है...
मैं ठहरा खड़ा हूँ, और
मेरा दिल खिंचा जा रहा है...
- Manvika Shveta