बाल कहानी
चूहे की टोपी
एक था चूहा। नाम था उसका चींची। एक दिन वह सैर को जा रहा था, उसे एक पेड़ के नीचे कुछ चमकीला-सा दिखाई दिया। वह दौड़कर पहुँचा वहाँ, देखा एक सुंदर लाल कपड़ा था। जो बहुत चमक रहा था। तभी वह खुशी से उछला और बोला - "अरे वाह कितना सुंदर कपड़ा है। इसकी तो मैं टोपी सिलवाऊँगा। शादी में जाऊँगा। सेल्फी लूँगा। गरम-गरम रसगुल्ले खाऊँगा। वाउ कितना मजा आएगा! यम्मी-यम्मी।"
ऐसा सोचकर उसने लाल कपड़े को उठाया और उलट-पुलटकर देखने लगा। टोपी सिलाने के लिए चाहिए एक दर्जी। चींची गया दर्जी के पास। पैसे तो थे नहीं उसके पास। दर्जी ने उसकी टोपी सिलने को मना कर दिया - "जाओ पहले पैसे लाओ, ऐसे नहीं सिलूँगा।" चूहा बहुत दुखी हुआ और कुछ सोचने लगा। उसे एक तरकीब सूझी। वो फिर से दर्जी के पास गया और बोला -
"पुलिस को बुलाऊँगा, पिटाई करवाऊँगा
नहीं तो टोपी सिल दो भैया, वरना जेल भिजवाऊँगा।"
दर्जी डर जाता है। उसकी टोपी सिल देता है। टोपी पहनकर चींची बहुत खुश हुआ। उसने सोचा अगर इस टोपी में सितारे भी होते तो मजा आ जाता। चूहा गया सितारे लगवाने। पहले तो सितारे वाले ने मना किया, फिर चूहे ने वही धमकी उसे भी दी -
"पुलिस को बुलाऊँगा, पिटाई करवाऊँगा
नहीं तो सितारे लगा दो भैया, वरना जेल भिजवाऊँगा।"
सितारे वाला डरकर जल्दी से सितारे लगा देता है। सितारे वाली टोपी पहनकर चूहा बहुत खुश हुआ। सोचा चलो अब पार्टी में चलते है। चूहा पहुँचा मंडप में लेकिन ये क्या? दरबान अन्दर ना जाने दे। उसने फिर वही धमकी दरबान को दी -
"पुलिस को बुलाऊँगा, पिटाई करवाऊँगा,
नहीं तो अन्दर जाने दो भैया, वरना जेल भिजवाऊँगा।"
दरबान भी डर जाता है। वो चूहे को अन्दर जाने देता है। चूहा अपनी समझदारी पर बहुत खुश हुआ। वो इठलाकर अकड़कर चलने लगा। कभी इधर फुदकता, कभी उधर फुदकता, शोर मचाता चूहा चला जा रहा था अपनी धुन में, रास्ते को बना मन ही मन में।
तभी अचानक उसका पैर फिसला, जा गिरा वो नाली में। हुई उसकी बहुत जग हँसाई और खिंचाई। टोपी भी गिर गई नाली में। अपनी टोपी को देख चूहा रोने लगा। तभी वहाँ आई एक नन्हीं चुहिया बोली मत रो भैया। जो हो गया, होने दो, आँसू पोंछो हँसो तो, यह लो खाओ रसमलाई, अब तो थोड़ा हँस दो भैया। आओ मिलकर करें हम ता-थैया, ता-थैया।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली