धक -धक दिल धड़कता है ' पल-पल सांसे चलती है।
टप-टप आंसू बहते है ' रो रो कर ये कहते हैं ' ।
सपने सारे चकनाचूर हुए ' मैं पिंजरे में कैंद हुए ' ।
जिंदगी मेरी थम सी गयी ' रुक सी गयी . मांजिल कोई है नहीं ' ।
पढ़ी -लिखी या अनपढ़ कोई नही है अन्तर आना सभी को पिंजरे के अन्दर ।
रास्ता कोई है नही ' न आंसू पोछने वाला न कहने वाला भूख लगी तो खा लो ' ।
पति हो या सास सब की एक ही बात 'सेवा करते रहना बस ।
राजी नही तो गैर राजी सही ' लात घूसो की या तानो की बौछार।
न कोई इंतजार ' न लगी कोई उम्मीद ' नसीब कहे या कर्मो की सजा ये तो बस ऊपर वाले को पता ' ।
बार -बार मैं कहती हूं ' सुनलो बेटी मेरी पुकार अपने दम पर जीना है सर उठा कर हम को जीना है।
न बंधक हम को बनना है न बंधन किसी को बनाना है।
जीओ और जीने हो ये मंत्र हमे अपनाना है।
आत्मनिर्भर बनकर खड़े होना किसी ओर के लिए अपने लिय जीना है।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein