ग़ज़ल - "तूने क्या छोड़ दिया".......
नज़रों से उतरे नहीं, दिल से उतार दिया तुमने,
भरी महफ़िल में हमें बेसहारा कर दिया तुमने।
सोचा था टूटेंगे तो आवाज़ आएगी,
तुमने तो बिना छुए ही चकनाचूर कर दिया हमें।
क्या मिला इश्क़ करके? ये मत पूछो,
एक हँसता हुआ शख्स, कब्र में उतार दिया तुमने।
जनाज़ा तो मेरा उठा नहीं अभी तक,
पर जीते जी कफ़न ओढ़ा दिया तुमने।
ज़हर देते तो एक पल में किस्सा खत्म होता,
तड़पने के लिए पूरी उम्र उधार दे दी तुमने।
जिन होंठों पर कभी खुदा की तरह नाम था मेरा,
उन्हीं होंठों से आज लावारिस करार दे दिया तुमने।
अब तो हाल ये है कि लोग पूछते हैं -
कौन था वो जिसने तुम्हें इतना लाजवाब कर दिया?
मैं कहता हूँ - नाम मत लो उसका,
जिसने बर्बाद करके भी, शायर बना दिया मुझे।