प्रेम कोई Competition नहीं है।
प्रेम में कोई दूसरा हारता नहीं; बल्कि अहंकार हारता है और अस्तित्व जीतता है।
जब तुम किसी को सच्चा प्रेम करते हो
और प्रेम की गहराई में उतरते हो, तो धीरे-धीरे तुम्हारा ‘मैं’ मिटने लगता है। जहाँ अहंकार शांत होता है,
वहीं परमात्मा की उपस्थिति प्रकट होने लगती है।
—सिकंदर की जीत बाहर थी
उसने जमीनें जीतीं, राज्य जीते, लोग जीते।
लेकिन भीतर उसका EGO और बड़ा होता गया।
प्रेमी की जीत बिल्कुल उलटी है।
वह किसी को जीतता नहीं, बल्कि स्वयं को हारने देता है।
जैसे दो प्रेमी एक-दूसरे के सामने झुकते हैं
—वहाँ कोई छोटा-बड़ा नहीं रहता।
दो शरीर रहते हैं,
लेकिन अहंकार की दूरी मिटने लगती है।
यही प्रेम की असली जीत है।
#ओशो का प्रसिद्ध कथन है:
—Love is the only Miracle...
—Love is not a Relationship,
Love is a State of Being...
प्रेम केवल किसी व्यक्ति के साथ संबंध नहीं है; प्रेम तुम्हारी Inner State बन जाए—तब तुम जहाँ हो, वहीं प्रेम की सुगंध है।
—मान लो किसी ने तुम्हें दुख दिया।
अहंकार कहेगा—“बदला लो।”
प्रेम कहेगा—“समझो।”
अहंकार कहेगा—“मैं सही हूँ।”
प्रेम कहेगा—“शायद हम दोनों कुछ सीख सकते हैं।”
जहाँ यह परिवर्तन आता है, वहीं प्रेम जीतता है।
और जब प्रेम जीतता है, तो वास्तव में तुम नहीं जीतते—तुम्हारे भीतर परमात्मा जीतता है।
परमात्मा कोई दूर बैठी हुई सत्ता नहीं है, बल्कि वह उपस्थिति है, जो तब अनुभव होती है, जब तुम्हारे भीतर ‘मैं’ का शोर शांत हो जाता है।
प्रेम में जब तुम स्वयं को खो देते हो,
तो अचानक पता चलता है—
जिसे मैं प्रेम कर रहा था,
वह भी उसी अस्तित्व का हिस्सा था;
और जिसे मैं “मैं” कह रहा था,
वह भी उसी का हिस्सा था।
तब प्रेमी और प्रेमिका के बीच की सीमा मिटती है और केवल Existence बचती है।
यही प्रेम की सबसे बड़ी जीत है—
प्रेम में जब “मैं” हार जाता है,
तभी परमात्मा जीत जाता है।
Love Wins,
because EGO Disappears;
and when EGO Disappears,
God appears...
प्रेम जीतता है,
क्योंकि अहंकार मिट जाता है;
और जब अहंकार मिट जाता है,
तब परमात्मा प्रकट होता है।