बेवकूफ़ बंदर - हास्य-व्यंग्य विधा
हम तेरे प्यार में पक्के बेवकूफ़ बंदर
दिल के बजाए दिमाग़ से हैं घनचक्कर ,
मन के बिना तेरे आंगन के घुम्मकड़
तेरी छत पर कूद-कूद कर हल्ला मचाएंगे ,
तेरे बाग-बगीचों में ऊधम मचाएंगे
तेरे गमलों के पौधों को उखाड़ फेंकेंगे |
हम तेरे प्यार में पक्के बेवकूफ़ बंदर
मंदिर के बजाय तेरी पूजा-पाठ करेगें ,
पेट भरकर तेरा व्रत उपवास करेगें
तेरी गली में भीख माग उपवास तोडेंगे ,
गधे पर उल्टी शान-शौकत से बैठकर
फटे हाल में केवल तुम्हें मिलने आएंगे |
हम तेरे प्यार में पक्के बेवकूफ़ बंदर
शांति छोड़ हुप..हुप.. चिल्लाएंगे ,
तेरे हाथों के डंडे शौक से खाएंगे
तेरे नाम का टैटू सीने पर बनाएंगे ,
तेरी डांट पर जोर-जोर से हंसेंगे
तेरे नखरें सात समुंदर पार उठाएंगे |
हम तेरे प्यार में पक्के बेवकूफ़ बंदर
गले में टाई की जगह रस्सी लटकाएंगे ,
तन पे शर्ट की जगह जंगली पत्ते लपेटेंगे
पाउडर की जगह चेहरे पर कालिख लगाएंगे ,
तेरी पुरानी सैंन्डल गले में अदब से पहनेंगे
पूरे शहर को तेरा दिवाना मंजनू बताएंगे |
क्योंकी, हम तो हर जगह पे ठहरे फालतु ,
बस तेरे प्यार में हम पक्के बेवकूफ़ बंजर
दिन भर बस मदारी के भालू जैसा नाचेंगे ,
तेरे इशारों पर पिंजरे का तोता जैसा चहकेंगे
दौडेगें तेरे पीछे हमेशा हम दुम हिलाकर ,
घुमेंगे तेरे आगे-पीछे पालतू जानवर जैसा ||
©®- शेखर खराड़ी
तिथि-५/९/२०२६