सखी तुम ऐसे क्यों हो गई?
जीवन है वह सबसे सुखी,
जहां मन की इच्छाएं पूरी होती है।
जब मन ही मन से रूठ जाए,
तब कहां नूरी पूरी होती है।
राखी तुम ऐसे क्यों हो गई??
आज भी वह दिन याद है जब ,
तुम अपने लिए नहीं अपने मन की।
दासी थी फिर क्या हुआ कि,
दासी ही महारानी बन गई मन की।
जीवन की आश नहीं छोड़ना ,सखी
क्योंकि यही तुम्हारी असली प्यास है।
मन की दौड़ कुचल कर आगे बढ़ाना ,दोस्त
क्योंकि यही तो तुम्हारी असली त्रास है।
सखी क्या तुम बदलोगी??
- Anshu kumari