लोग तो बदलते देखे हैं मैंने,
लेकिन वक्त के साथ अपने भी बदलते हैं, ये देखा है मैंने।
जो अपने कहते हैं,
वही सामने से कब धोखा देकर
खुद मासूम बन जाएंगे
और आप गलत हो जाओगे, ये देखा है मैंने।
मेरी मासूमियत को बहुत अच्छे से खत्म करके
एक समझदार इंसान बनाने वाले भी अपने ही हैं, ये देखा है मैंने।
सबके साथ होते हुए भी
अकेलेपन का एहसास दिलाने वाले भी अपने ही हैं,
ये देखा है मैंने।
ये अपने ही हैं,
जो बुरे वक्त में साथ तो चलते हैं,
लेकिन हर बार एहसास दिलाते हैं—
“हम हैं, तब तू खड़ी है,
वरना कोई नहीं देखता तुझे।”
यार, ये भी देखा है मैंने।