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Ritu Kumari

Ritu Kumari

@ritukumari509471


"ठहरा हुआ पल"
[मुखड़ा] ढलती शाम और शांत हवा,
दिल में छुपा है एक ख़ामोश समां।
लहरों की धुन पर बहता जाए,
मन का यह पंछी, ढूंढे नया रास्ता।
[अंतरा 1] उम्मीदों के रंगों से सजी है यह राह,
हर मुश्किल में छुपी है एक नई चाह।
सपनों के पन्नों पर लिखी है दास्तान,
कोशिशों से ही बनता है इंसान।
[अंतरा 2] सब्र की राहों पर कदम बढ़ते जाएं,
जो देखे हैं ख्वाब, वो पूरे हो जाएं।
आज का अंधेरा कल रोशनी लाएगा,
हर बहता दरिया अपनी मंज़िल पाएगा।

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लकीरें कागज़ पर खिंचीं और तराना बन गया,
दो दिल जब पास आए तो अफ़साना बन गया।
ना होंठ हिले ना बातें हुईं, बस नज़रें टकराईं,
पेंसिल की हर एक रंगत में मोहब्बत मुस्कुराई।
रंगों की ज़रूरत किसे, जब शेड्स में इतनी गहराई हो,
लगता है जैसे हर सांस में सिर्फ़ उसी की परछाई हो।
हुनर की इस कलाकारी ने जादू ऐसा चलाया है,
मैंने अपनी ही लकीरों में पूरा जहां बसाया है।

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अजीब मोड़ पर ले आई है ये ज़िंदगी,
ना वो हसीं शामें रहीं, ना वो बेफ़िक्र साज़-ओ-सामान रहा...
बस एक ख़ामोश सी आह भर के दिल कह उठता है,
"क्या दिन थे वो भी, जो बीत गए और सिर्फ़ याद बनकर रह गए।"❤️

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जिंदगी, कुछ तो बता...
तू क्या चाहती है मुझसे, ज़रा सा तो इशारा दे,
मुकम्मल ना सही, भटकती कश्ती को कोई किनारा दे।
हर कदम पर नए इम्तिहानों की यह कैसी कतार है?
तेरी खामोशियों में भी छुपता, कौन सा राज़ज़ार है?
जिंदगी कुछ तो बता, आखिर यह कैसी राह है?
जवाबों की तलाश में, हर सांस क्यों एक आह है?
धूप-छांव के खेल में, हम पल-पल ढलते जाते हैं,
गिर-गिर कर संभलते हैं, और आगे बढ़ते जाते हैं।
अगर तू कोई पहेली है, तो सुलझना भी तेरा काम है,
इस बिखरी हुई दास्तान में, छिपा खुशियों का मुकाम है।
तू जितना भी आज़मा ले, हम झुकने वाले नहीं,
थका सकती है तू राहों में, पर हम रुकने वाले नहीं।
दर्द को दवा बनाकर, हम फिर मुस्कुराएंगे...
तू भले चुप रहे, हम ज़िंदादिली का परचम लहराएंगे!
🕊️🕊️🕊️

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"मैं वो आम सी हसरत नहीं जो हर किसी के हिस्से आ जाऊँ"
मैं ख़ास हूँ, कोई आम नहीं
मैं वो आम सी हसरत नहीं,
जो हर किसी के हिस्से आ जाऊँ।
ना वो काग़ज़ का कोई पन्ना हूँ,
जो हर कहानी में सिमट जाऊँ।
मैं तो वो अनसुलझा सा ख़्वाब हूँ,
जो सिर्फ़ किसी की गहरी रातों में ढलता है।
मैं वो दीपक हूँ,
जो हर हवा के झोंके पर नहीं,
सिर्फ़ अपनी ही लौ में जलता है।
लोग कहते हैं झुक जाना ही रीत है,
पर मेरी सादगी में भी एक अलग ग़ुरूर है।
मुझे पा लेना इतना आसान नहीं,
मेरा हर एक लम्हा, मेरा हर एक नशा फ़ितूर है।
मेरी अपनी पहचान
नज़रों से जो नापा जाए,
मैं वो दायरा नहीं।
भीड़ का जो हिस्सा बन जाए,
मैं वो आवारा मुसाफ़िर नहीं।
मेरी अपनी एक दुनिया है: जहाँ मेरी शर्तें चलती हैं, दूसरों के इशारे नहीं।
मेरी अपनी एक आग है: जो मुझे अपनी ही चमक से रौशन रखती है, किसी और के उजाले से नहीं।
जो तरसते हैं मेरी एक झलक को,
उन्हें मेरा सलाम है।
पर जो मुझे हलके में लें,
उनका रास्ते में ही ठहराव है।
मैं वो आम सी हसरत नहीं,
जो हर किसी के ख़्वाबों में ढल जाऊँ।
मैं वो समंदर हूँ,
जो अपनी लहरों की मर्ज़ी से बहता है,
किसी तिनके की तरह राह नहीं बदलता।
अपनी शर्तों पर जीना
मुझे हर किसी की वाह-वाही की चाहत नहीं,
ना मुझे किसी महफ़िल का शृंगार बनना है।
मुझे तो बस अपनी ही नज़रों में,
एक निडर, अडिग और बेबाक़ किरदार बनना है।
जो समझा है मुझे, वही पा सका है मेरी रूह का सुकूँ।
जो सिर्फ़ पाना चाहता था, वो आज भी खाली हाथ खड़ा है।
मैं एक ऐसी पहेली हूँ,
जिसका जवाब हर कोई ढूँढ नहीं सकता।
मैं वो ख़ास एहसास हूँ,
जिसे कोई महज़ बातों से छू नहीं सकता।
अंतिम संदेश
इसलिए ऐ दुनिया,
मुझे अपने तराज़ू में तोलना बंद कर।
मेरी सादगी को मेरी कमज़ोरी समझना बंद कर।
मैं वो आम सी हसरत नहीं जो हर किसी के हिस्से आ जाऊँ,
मैं वो नायाब पन्ना हूँ,
जो सिर्फ़ उसी किताब में सजेगा,
जिसमें मेरी कद्र का पक्का यक़ीन होगा।

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जलते दिए 💖
अंधियारे की छाती चीर,
वो जलता है एक अधीर।
छोटा सा है उसका तन,
पर पर्वत सा उसका मन।
आँधी आए या तूफ़ान,
झुकने को ना तैयार।
तेल ख़त्म हो जाए भले ही,
लड़ता रहता है हर बार।
सीख यही वो दे जाता है,
स्वयं जलकर जग महकाता है।
हार न मानो तुम जीवन में,
दीप वही जो राह दिखाता है।
- Ritu Kumari

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मन में एहसास क्यों है?
भीतर एक अनकहा सा शोर है,
ख्यालों की बहती एक महीन डोर है।
सीने में धड़कती इस साँस के साथ,
न जाने कैसा यह अनसुलझा अहसास है?
कभी आँखों में अकारण उमड़ती नमी है,
सब कुछ होकर भी जाने किसकी कमी है।
हज़ारों की भीड़ में जो तन्हा कर दे,
बताओ यह कौन सा गहरा अहसास है?
क्या यह बीते हुए कल की कोई पुकार है?
या आने वाले कल का अधूरा इंतज़ार है?
जो बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाता है,
दबे पाँव आकर रूह में समा जाता है।
कभी यादों की छाँव, कभी धूप सा जलाए,
यह अहसास ही तो इंसान को इंसान बनाए।
अगर न होता यह अहसास हमारे इस मन में,
तो हम महज़ पत्थर हो जाते इस जीवन में।
दुख में इन पलकों का चुपचाप भीग जाना,
सुख की छोटी सी आहट पर मुस्कुराना,
किसी और की तकलीफ देखकर दिल का पिघलना,
और गिरकर फिर नई उम्मीद से सँभलना।
यह सब इस बात की गवाही देता है,
कि दिल के कोने में कोई अहसास रहता है।
यह अहसास ही हमें अपनों से जोड़ता है,
सहानुभूति की डोर से दिलों को बाँधता है।
ज़िंदगी की इस बेरंग और भागदौड़ भरी राहों में,
यही तो चुपके से मीठे रंग घोलता है।
ना होता यह तो कोई किसी के लिए न रोता,
ना प्यार की भाषा होती, ना कोई सपना होता।
कभी यह मीठी सी टीस बनकर सताता है,
तो कभी अंधेरों में उम्मीद का दिया जलाता है।
यह भावना ही तो रूह का सच्चा संगीत है,
जो हर दिल में बसता एक अनकहा गीत है।
जब रिश्तों की डोर कभी ढीली पड़ने लगती है,
यह अहसास ही तो चुपके से उसे थाम लेता है।
गैरों के दर्द में जो बहता है आँसू बनकर,
इंसानियत का वही तो असली पैगाम देता है।
ना हो अगर अहसास तो यह दुनिया सूनी हो जाए,
हर मुस्कान झूठी और हर आँख कोरी हो जाए।
यह वो अदृश्य धागा है जो जग को जोड़े है,
हर टूटते हुए दिल को फिर से मोड़े है।
कभी राहों में बिखरी खामोशी को पढ़ लेता है,
कभी बिन कहे ही दूसरों का हाल समझ लेता है।
यही तो सिखाता है हमें निस्वार्थ प्रेम करना,
बिना किसी शर्त के दूसरों के लिए जीना।
जब रातों को नींद आँखों से रूठ जाती है,
और खयालों की एक नई दुनिया सज जाती है,
तब यही अहसास बनकर हमसफ़र साथ चलता है,
अंधेरे कमरों में भी एक चिराग सा जलता है।
यह न हो तो शब्दों का कोई मोल न रहे,
फिर काव्यों में मिठास और गीतों में बोल न रहे।
चित्रकार की तुलिका का रंग फीका पड़ जाए,
और कवि की कल्पना का अंत हो जाए।
इसलिए बहने दो इस अहसास की पावन धारा को,
महसूस करने दो मन के हर छोटे-बड़े इशारे को।
इसे रोको मत, यह कोई बोझ या दर्द नहीं,
यह तो हमारी ज़िंदादिली का सबसे बड़ा सबूत है।
कि हमारा दिल आज भी धड़कता है,
हर सुख-दुख को गहराई से महसूस करता है,
और इस पूरी दुनिया को अपनी आगोश में,
सच्ची संवेदनाओं के साथ समेटने की ताक़त रखता है

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ये पल यूँ ही गुजर जाएगा
उदासियों के काले बादल,
छाए हैं जो आज गगन पर,
छँट जाएँगे धीमे-धीमे,
सूरज फिर मुस्काएगा।
धीरज धर ओ राही मन तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जिस धूप से जलती है काया,
वही तो फल को पकाती है,
जिस राह में बिखरे हैं काँटे,
वही तो मंज़िल तक जाती है।
अँधेरी रात का अंतिम पहर ही,
नया सवेरा लाएगा,
तू हार मत मान ऐ परिंदे,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सुख की सरगम, दुख की रोदन,
जीवन के दो रूप यही हैं,
छाँव कभी तो कभी है धूप,
जग के शाश्वत रीत यही हैं।
चक्र समय का घूम रहा है,
जो आया है वो जाएगा,
ना ठहर सका है काल कभी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
तू क्यों चिंता के सागर में,
व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा?
बीत गए जो दिन कल वाले,
उन्हें याद कर क्यों रो रहा?
आज जो तेरा अपना है,
कल कोई और ले जाएगा,
बहा ले हँसी की नदियाँ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सपनों के जो महल ढहे हैं,
फिर से नई नींव धर ले,
टूटे पंखों को समेट कर,
अंबर की फिर उड़ान भर ले।
ज़िंदगी नाम है चलने का,
ठहरा पानी सड़ जाएगा,
तू कदम बढ़ा आगे अपने,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हँसकर सह ले हर बाण समय का,
यह भी एक इम्तिहान ही है,
जीत-हार तो एक पहेली,
संघर्ष ही पहचान ही है।
जब दुख के पर्वत पिघलेंगे,
सुख का झरना बह जाएगा,
मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
रिश्ते-नाते, मान और माया,
सब माटी का एक ढेला है,
आए थे हम अकेले जग में,
जाना भी तो अकेला है।
फिर किस बात का अभिमान करे तू,
क्या साथ तेरे जाएगा?
जो आज तेरा है, कल न रहेगा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
चट्टानों को फाड़कर भी तो,
नन्हे पौधे उग आते हैं,
तूफानों से जो लड़ते हैं,
वही तो इतिहास बनाते हैं।
घबरा मत इस खामोशी से,
शोक का शोर थम जाएगा,
रख विश्वास तू अपने रब पर,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हर शाम के बाद आती है सुबह,
हर पतझड़ के बाद बहार,
फिर महकेंगे उपवन तेरे,
फिर गूँजेगी कोयल की पुकार।
साँसों का यह अनमोल सफ़र,
धीरे-धीरे घट जाएगा,
जी ले हर लम्हा खुलकर तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
उदासियों के काले बादल,
छाए हैं जो आज गगन पर,
छँट जाएँगे धीमे-धीमे,
सूरज फिर मुस्काएगा।
धीरज धर ओ राही मन तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जिस धूप से जलती है काया,
वही तो फल को पकाती है,
जिस राह में बिखरे हैं काँटे,
वही तो मंज़िल तक जाती है।
अँधेरी रात का अंतिम पहर ही,
नया सवेरा लाएगा,
तू हार मत मान ऐ परिंदे,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सुख की सरगम, दुख का रोदन,
जीवन के दो रूप यही हैं,
छाँव कभी तो कभी है धूप,
जग की शाश्वत रीत यही हैं।
चक्र समय का घूम रहा है,
जो आया है वो जाएगा,
ना ठहर सका है काल कभी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
तू क्यों चिंता के सागर में,
व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा?
बीत गए जो दिन कल वाले,
उन्हें याद कर क्यों रो रहा?
आज जो तेरा अपना है,
कल कोई और ले जाएगा,
बहा ले हँसी की नदियाँ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सपनों के जो महल ढहे हैं,
फिर से नई नींव धर ले,
टूटे पंखों को समेट कर,
अंबर की फिर उड़ान भर ले।
ज़िंदगी नाम है चलने का,
ठहरा पानी सड़ जाएगा,
तू कदम बढ़ा आगे अपने,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हँसकर सह ले हर बाण समय का,
यह भी एक इम्तिहान ही है,
जीत-हार तो एक पहेली,
संघर्ष ही पहचान ही है।
जब दुख के पर्वत पिघलेंगे,
सुख का झरना बह जाएगा,
मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
रिश्ते-नाते, मान और माया,
सब माटी का एक ढेला है,
आए थे हम अकेले जग में,
जाना भी तो अकेला है।
फिर किस बात का अभिमान करे तू,
क्या साथ तेरे जाएगा?
जो आज तेरा है, कल न रहेगा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
चट्टानों को फाड़कर भी तो,
नन्हे पौधे उग आते हैं,
तूफानों से जो लड़ते हैं,
वही तो इतिहास बनाते हैं।
घबरा मत इस खामोशी से,
शोक का शोर थम जाएगा,
रख विश्वास तू अपने रब पर,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
हर शाम के बाद आती है सुबह,
हर पतझड़ के बाद बहार,
फिर महकेंगे उपवन तेरे,
फिर गूँजेगी कोयल की पुकार।
साँसों का यह अनमोल सफ़र,
धीरे-धीरे घट जाएगा,
जी ले हर लम्हा खुलकर तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
मायूसी के अंधेरे में भी,
उम्मीद की एक शमा जला,
जो रूठ गए हैं ख़्वाब तेरे,
उन्हें मनाकर फिर से चला।
अंगारों पर चलकर ही तो,
सोना कुंदन बन पाएगा,
हौसला रख तू अपने दिल में,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
वक़्त का दरिया बहता जाए,
कोई इसे रोक न पाए,
कितने आए, कितने गए,
कोई अपना निशान न छोड़े जाए।
फिर भी तू इस बहती धारा में,
क्यों अपना धीरज खोता है?
दुख की घड़ियाँ ढल जाएँगी,
जब नया प्रभात मुस्कुराएगा।
तू राह देखकर मत घबरा,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
जो खो गया वो लौटेगा नहीं,
जो पाना है वो आगे है,
सपनों की इस पतंग की,
उम्मीद ही तो धागे हैं।
जब तक साँसें चलती हैं तेरी,
तब तक आस बाकी है,
जीवन के इस समर में तू,
खुद से कभी न हारी है।
कल का सूरज फिर एक बार,
नई उम्मीदें लाएगा,
सबर रख ओ मन के पंछी,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
समय न रुका है किसी के लिए,
न ये कभी रुक पाएगा,
जो आज तुझे तड़पाता है,
कल वही सुकून दे जाएगा।
ज़िंदगी की इस कठिन किताब का,
एक पन्ना यह भी बीत जाएगा,
मुस्कुरा कर आगे बढ़ तू,
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा।
सार: समय कभी एक जैसा नहीं रहता। सुख हो या दुख, सफलता हो या असफलता—संसार का सबसे बड़ा नियम यही है कि "यह समय भी बीत जाएगा।" इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य और आशा बनाए रखें

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