इस खामोश रात के साए में,
हर उलझन को थोड़ा बहने दो।
जो बातें दिन में कह न सके,
आज दिल को वो सब कहने दो।
हर दर्द, खुशी, और टूटे ख्वाब,
सीने में बसा कर सो जाओ।
आहें भी आज आजाद कर दो,
जज्बात में पूरे खो जाओ।
सोने दो आंखों को एक पल अब,
हर जख्म को मरहम मिलने दो।
इस रात के मीठे साए में,
दिल को जी भर के भरने दो।