मैं और मेरे अह्सास
त्याग और समर्पण
त्याग और समर्पण भीतरी घटना हैं l
खुद के अंदर चैन ओ सुकून भरना हैं ll
बलिदान का भाव, गहरा हृदय रखो l
मुकम्मिल प्रेम की राहों में चलना हैं ll
प्रारब्ध सोने चांदी जैसे चमकेगा तो l
यही अच्छे सच्चे व्यक्ति का गहना हैं ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह