sisakati Wafa-ek adhuri Mohabbat ki mukmmal Dastan - 14 in Hindi Love Stories by Babul haq ansari books and stories PDF | सिसकती वफ़ा: एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल दास्तान - 14

Featured Books
Categories
Share

सिसकती वफ़ा: एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल दास्तान - 14

                     भाग:14.  

             रचना:बाबुल हक़ अंसारी

आग अब दैत्य की तरह चारों ओर भड़क चुकी थी।
सर्वर रूम की दीवारें दरकने लगी थीं,
और हर सेकंड मौत उनकी सांसों को घेर रही थी।

आर्यन ने EMP ग्रेनेड को हथेली में दबाते हुए कहा —
“एक बार ये फटा, तो हमें सिर्फ़ बीस सेकंड मिलेंगे… फिर सब खत्म।”

आयशा काँपते हुए बोली —
“बीस सेकंड में… क्या सच को बचाया जा सकता है?”
अयान ने उसकी आँखों में देखा,
और उसकी आवाज़ में पहली बार डर की जगह यकीन था —
“सच को बचाना हमारी मोहब्बत से भी ज़्यादा जरूरी है…
क्योंकि वही हमें अमर करेगा।”

हुड वाला आदमी अचानक जोर से हँसा,
उसकी हँसी में बारूद की गंध घुली हुई थी।
“तुम सोचते हो कि मैं इतने सालों से बनाया ये खेल हार जाऊँगा?”
उसने पास के कंट्रोल-पैनल पर हाथ मारा,
और अचानक दर्जनों ड्रोन छत से नीचे उतरने लगे —
उनकी लाल आँखें ऐसे चमक रही थीं मानो जल्लाद तलवारें ताने खड़े हों।


आर्यन ने झटके से ग्रेनेड फेंका।
“अब या कभी नहीं!”
एक तीखी चमक हुई,
पूरा कमरा बिजली की तरह थरथराया,
ड्रोन कुछ पल के लिए हवा में जम गए।

“जाओ!” — उसने गरजते हुए अयान और आयशा को धक्का दिया।


आग की लपटों को चीरते हुए अयान और आयशा सर्वर-कोर तक पहुंचे।
सर्वर के पिघलते पैनल से चिंगारियां उड़ रही थीं,
लेकिन अयान ने दस्तानों से जलते तारों को पकड़ लिया।
उसकी उंगलियां झुलस रही थीं,
फिर भी उसने कसम खाई थी — सच आज ज़िंदा बचेगा।

आयशा ने डेटा-की स्लॉट में डाली,
स्क्रीन पर लिखा चमका — “Authenticating…”
टाइमर: 17… 16… 15…”


हुड वाला आदमी अब भी पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा था।
उसने बंदूक उठाई,
और ठंडी आवाज़ में बोला —
“सच कभी बाहर नहीं जाएगा…
क्योंकि मैं तुम्हारे दिल पर गोली चला दूँगा।”


अयान ने उसकी तरफ़ देखा,
और पहली बार उसकी आँखों में आँसू थे —
गुस्से के नहीं, मोहब्बत के।
उसने आयशा का हाथ थामा और कहा —
“अगर मौत भी आई… तो सच के साथ आए।”

धायंंंं…

गोली चली…

और स्क्रीन पर आखिरी शब्द चमका —
“Data Extracted – Success”


“मोहब्बत या मौत – फाइनल सच्चाई”


धुएँ और गोलियों की गूंज के बीच,
समय जैसे थम-सा गया था।
गोली की आवाज़ अब भी कानों में गूंज रही थी,
और धुएँ के पर्दे में कोई गिरा —
लेकिन कौन… ये पल भर कोई समझ नहीं पाया।


आयशा ने चीखते हुए हाथ बढ़ाया —
“अयाaan…!”

धुएँ के पीछे आर्यन जमीन पर घुटनों के बल था।
उसके सीने से खून बह रहा था,
चेहरे पर मुस्कान थी —
“मैंने कहा था ना… मेरे दोस्त की मोहब्बत अधूरी नहीं रहेगी।”

उसने काँपते हाथों से अयान की हथेली पकड़ी,
और धीरे से फुसफुसाया —
“भाई… आयशा को बचाना… सच को बचाना…
मेरी बाज़ी यहीं खत्म हुई।”

और उसकी आँखें बंद हो गईं।

हुड वाला आदमी ठहाका मारकर बोला —
“देखा? सच कभी पूरी तरह नहीं बचता…
एक न एक क़ुर्बानी तो लेता ही है।”
उसने फिर बंदूक उठाई,
लेकिन इस बार अयान की आँखों में डर नहीं,
आग थी।


अयान ने जलते हुए पैनल से एक धातु की रॉड खींची,
उसकी हथेली जल गई,
लेकिन उसने दर्द को निगलते हुए हुड वाले पर झपट्टा मारा।
दोनों के बीच आग की लपटों में भीषण भिड़ंत हुई।
बंदूक ज़मीन पर गिरी,
मुंह से खून उगलते हुए भी अयान लड़ता रहा।

आयशा ने स्क्रीन पर चमकते शब्द देखे —
“Data Uploading… 70%”
उसकी आँखों में अब आँसू नहीं,
लोहे जैसा इरादा था।


आखिरी वार में अयान ने हुड वाले को दीवार से दे मारा।
काँच की शार्प शीट उसके सीने में धँस गई।
हुड वाला तड़पते हुए बोला —
“तुम… सोचते हो… सच… तुम्हें जिंदा छोड़ेगा?”

और खून के साथ उसकी हँसी बुझ गई।

अयान ज़मीन पर गिर पड़ा।
उसकी साँसें भारी थीं,
चेहरे पर जलन के निशान,
लेकिन नज़रें सिर्फ़ स्क्रीन पर थीं।

“…98% … 99% … 100% — Data Uploaded Successfully.”

आयशा ने झुककर उसका चेहरा थामा।
“अयान… हम जीत गए… सुन रहे हो?”

अयान ने मुश्किल से मुस्कुराते हुए कहा —
“सच… अब दुनिया का है…
और तुम… हमेशा मेरी रहोगी…”

उसकी पलकों पर आखिरी कंपन हुआ,
और हाथ ढीला पड़ गया।


आयशा चीख पड़ी।
आग, धुआँ, राख… और उसके बीच
उसकी मोहब्बत की आखिरी सांस।

लेकिन उसी पल स्क्रीन पर लिखा चमका —
“Footage Broadcasted Worldwide”

सच पूरी दुनिया तक पहुँच चुका था।

(जारी है…)
अगला अध्याय (25): “सिसकती वफ़ा – अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल दास्तान”
जहाँ आयशा की आँखों से बहते आँसू और पूरी दुनिया की आँखों के सामने आया सच,
मोहब्बत और क़ुर्बानी को एक साथ अमर कर देगा।