Tere Mere Darmiyaan - 48 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 48

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तेरे मेरे दरमियान - 48

विकास काली को फोन करता है और कहता है --

विकास :- भाई जैसा आपने कहा था के मैं जानवी को इंग्नौर करु और उसका फोन ना उठाऊ , मैने वैसा ही किया । पर भाई इससे क्या होगा ?

काली :- अबे जले हूए माचिस की तिल्ली । मेरे पंटर लोग 2 दिन से उस लड़की को उठाने का कोशिश कर रहा है पर वो साली घर से निकलती ही नही है , और निकलती है तो उसके साथ उसका हसबेंड होता है । 

विकास हैरानी से पूछता है --

विकास :- तो इसमे मेरे फोन ना उठाने से क्या होगा । क्या काली भाई, तुमने इतना भी दिमाग नही है ।

विकास के इतना कहने पर काली भाई को गुस्सा आ जाता है और काली गुस्से से चिल्लाकर कहता है --

काली :- ऐ , काली भाई के साथ मस्करी नही । साले क्या बोला तु , मेरा दिमाग नही है , तेरे भेजे दो गोली डालूगां तब पता चलेगा तुझे । साले मुझे समझाने मत आना, मैं तो लोगों को समझदारी सिखा के सुला देता हूँ!” । 

काली फिर गुस्से से कहता है ---

काली :- साले तेरी औकात तो उस धूल जैसी है जो मेरे जूते से चिपककर ऊपर उठ जाती है! और तु मुझे सिखा रहा है ।

इतना डॉयलॉग सुनकर विकास कहता है ---

विकास : - समझ गया भाई, बस करो । आप जैसा बोलोगे , मैं वैसा ही करेगा । मेरा मतलब करुगां ।

काली :- अब ध्यान से सुन । तु जितना उस लड़की को इग्नोर करेगा वो तेरे पिछे आएगी और फिर मेरा काम आसान हो जाएगा । समझा क्या ।

विकास :- समझ गया भाई ।

जानवी अपने मे बैठी थी तो जानवी अपना फोन लेती है और विकास को फोन करती है , फोन रिंग होता है पर विकास फोन काट देता है , जानवी बहोत परेशान हो जाती है । 

जानवी :- ये विकास को हो क्या गया है , मेरा फोन क्यों नही उठा रहा है । उसके ऑफिस जाकर दैखती हूँ ।

इतना बोलकर जानवी घर से निकल जाती है , जानवी को अकेली दैखकर काली के लोग खुश हो जाता है , और उनमे से एक काली को फोन करके कहता है --

गुडां :- भाई आपकी प्लानिंग काम कर गई है , जानवी घर से अकेली निकल गई है ।

काली :- अबे वो , खाली पिली टेम कायको खोटी कररेली है , जा और उठा ले लड़की को ।

गूडां :- जी भाई ।

जानवी अकेली पैदल चल रही थी के तभी कृतिका की नजर जानवी पर पड़ती है ।

कृतिका :- ये जानवी अकेली कहां जा रही है , जाकर दैखती हूँ ।

कृतिका इतना बोलकर जानवी की और बड़ ही रही थी के तभी एक गाड़ी जानवी के पास आकर रुकती है और जानवी को जबरदस्ती गाड़ी मे बैठा लेता है --

जानवी :- कौन हो तुम लोग , छोड़ो मुझे । 

जानवी चिल्लती है के तभी एक जानवी के मुह मे कपड़ा बांध देता है और जानवी को वहां ले कर चला जाता है । 

कृतिका गाड़ी के पिछे भागती है पर तब तक वो लोग निकल चुके थे । कृतिका जल्दी से एक ऑटो को रोकती है और उस गाड़ी का पिछा करने लगती है । कृतिका जल्दी से आदित्य को फोन लगाती है --
आदित्य :- कृतिका , बोलो ।

कृतिका (घबराती हूई ) :- आदि , आदि , वो जानवी ।

जानवी का नाम सुनकर आदित्य घबरा जाता है और कहता है --

आदित्य :- कृतिका , क्या हूआ जानवी को ।

कृतिका :- आदित्य वो जानवी , कुछ गुडें जानवी को पकड़ कर ले गए ।

आदित्य कृतिका से इतना सुनकर हैरान था ।

आदित्य :- क्या । जानवी को गुडें उठा ले गए । कृतिका कौन था वो लोग और कहां लेकर गए है ।

कृतिका :- मुझे वो तो नही पता ।

आदित्य :- तुम अभी कहां हो जानवी ?

कृतिका :- हीरापुर मोड़ पर ।

आदित्य :- क्या तुम उन लोगो का पिछा कर सकती हो ।

कृतिका :- मैं ऑटो से उसी के पिछे जा रही हूँ ।

आदित्य :- गुड, तुम उसके पिछे चलो मैं अभी आता हूँ ।

आदित्य मॉल से जल्दी जल्दी निकल जाता है और अपनी कार लेकर कृतिका के पास पहूँच जाता है । आदित्य दैखता है के कृतिका मैथन डैम के पास अकेली खड़ी थी । आदित्य कार रोकता है और कृतिका के पास जाकर कहता है --

आदित्य :- कृतिका , वो लोग किधर गए ।

कृतिका :- मैने उस गाड़ी को इस जंगल के अंदर जाते हूए दैखा , ऑटो इससे आगे नही गया । इसलिए मैं यही रुक गई ।

आदित्य: - बहोत बढ़िया कृतिका । आओ बैठो ।
आदित्य और कृतिका गाड़ी मे बेठकर जंगल के अंदर चला जाता है ।

इधर वो गुडें जानवी को गाड़ी से उतारकर मैथन के जंगल के बिच मे एक घर पर लेकर जाता है जहां काली पहले सी ही उन लोगो का इंतेजार कर रहा था । वो गुडें जानवी के मुह से कपड़ा हटा देता है ।

जानवी अंदर जाकर दैखती है के वहां पर आदमी ( काली ) था । जानवी काली से कहती है --

जानवी :- कौन हो तुमलोग और मुझसे क्या काम ?

काली :- काम है तभी तो उठाया है । 

जानवी :- बोलो क्या चाहिए तुम्हें, पैसे चाहिए ना , कितने पैसे चाहिए बोलो मैं लाकर दूगीं ।

काली :- पैसे तो हमे मिल चुका है , हमे और पैसा नही चाहिये वो क्या है ना धंधे पर बैठा हूँ और धधें मे बेईमानी करुगां तो लोग क्या कहेगें ।

जानवी :- तो फिर और क्या चाहिए ?

काली :- हां .. ये हुई ना बिजनेस डिल वाली बात । 

काली अपने एक आदमी से पेपर मांगता है ।

काली :- ऐ ला रे ।

वो आदमी पेन और पेपर काली को दे देता है , काली पेन पेपर लेकर जानवी के पास जाता है और कहता है --

काली :- ले इस पर साईन कर दे और चली जा , जहां जाना है ।

जानवी पेपर दैखकर कहती है --

जानवी :- ये तो खाली है ।

काली :- हां खाली है , पर तु टेंशन मत ले , इस पर हम कोई मडर वडर का कंफेशन नही लिखूंगा । 

जानवी :- तो फिर क्या चाहिए ।

काली :- वो शायद उसे तेरा पुरा प्रॉपटी चाहिए ।

जानवी :- किसे ?

काली :- क्या बड़ी श्याना बनती है रे तु , अपने यहां कुछ लिखा है क्या । तु नाम पुछेगी और मैं तेरे को बता देगी । इतना सिम्पल समझा है क्या । काली हूँ मैं, साया भी मेरे सामने आने से डरता है समझी क्या । अब चल साईन कर ।

जानवी :- तुझे क्या लगता है तेरी इस धमकी से मैं डर जाएगा । 

काली :- दैख गुस्सा मत दिला मुझे समझी । मेरे गुस्से का टाइम नहीं होता… ये सीधा चढ़ता है और सब कुछ फूंक देता है! 

जानवी :- तु बहोत पछतायेगा । गलत कर रहा है तु काली ।

काली : - मैं गलत नहीं हूँ रे, बस दुनिया मेरी सही नहीं झेल पाती!” इसिलिए मैं सबको गलत लगता है । अब चल ज्यादा मस्करी मत कर और साईन कर फचाफट ।

जानवी :- तुम चाहे कुछ भी कर लो मैं साईन नही करुगीं

काली :- पता था मुझे के तु साईन नही करेगी , इसिलिए उसका भी जुगाड़ किया है मैने । लाओ रे बुड्डें को ।

तभी वहां पर कुछ गुडें अशोक को पकड़कर ले आता है , जानवी अपने पापा को दैखकर हैरान थी और अशोक जानवी को दैखकर हैरान था । 

अशोक :- जानवी , बेटा तुम्हें भी ये लोग ।

जानवी :- पापा आप ठिक हो ।

काली :- बस बस बहोत हो गया तुम बाप बेटी का मिलन । एब तु चुप चाप साईन करती है या बुड्डे को उपर भेजु ।

अशोक :- नही बेटा तुम साईन मत करना , चाहे मेरे साथ ये लोग कुछ भी करे , तुम साईन मत करना ।

काली :- मेरा नाम सुन के सिहर जाते हैं लोग, और जिसने मुझे देखा… वो खामोश हो जाता है , पर तु साले बुड्डे मुझे अकड़ दिखा रहा है ।

अशोक :- तुम लोग बचोगे नही , तुम्हें सजा कानून देगी । पुलिस को मैं सब बता दूगां ।

काली ( हसते हूए ) :- हा हा ... पुलिस । “काली जब तक जिंदा है, पुलिस की छुट्टी है ।

काली के डायलॉग से उसके आदमी सब भी परेशान हो गए थे । तभी एक अपने साथी से धिरे कहता है --

गूडां :- ये साला ऐसे ही डॉयलॉग बाजी करते रहा तो कही सच मे पुलिस आ ना जाए । अपने काम पर तो ध्यान नही डॉयलॉग बाजी करना है इसे ।

काली अशोक के कनपट्टी पर बंदूक रखता है और कहता है ।

काली :- दैखो मेडम , अपन लड़कियों की बहोत रेस्पेक्ट करता है इसलिए तेरे बाप को उठालाया , वरना तेरे साथ कुछ भी कर सकता था मैं । और फिर तुझे साईन करना पड़ता । अब चुप चाप साईन कर वरना इस बुड्डे की खोपड़ी खोल दूगां ।

काली अशोक से कहता है --

काली :- अबे खून बहाने से पहले चल आख़िरी दुआ पढ़ ले । तेरा टाईम खतम ।

अशोक :- भगवान तुझे कभी माफ नही करेगा कमीने । 

काली :- ठीक है रे , तू भगवान पे भरोसा रख, मैं अपने हाथों पे ।

जानवी डर जाती है और काली को रौकते हूए कहती है --

जानवी :- नही रुको । मैं साईन करती हूँ , पापा को छोड़ दो , उन्हें कुछ मत करो ।


To be continue.....337