जानवी डर जाती है और काली को रौकते हूए कहती है --
जानवी :- नही रुको । मैं साईन करती हूँ , पापा को छोड़ दो , उन्हें कुछ मत करो ।
काली अपने आदमी को इशारा करके पेपर जानवी को देने को कहता है वो आदमी पेपर और पेन जानवी को दे देता है , जानवी उस पर साईन कर देती है । और पेपर उस आदमी को दे देती है । तब काली कहता है --
काली :- बस हो गया , अब दोनो जा सकते हो , इतनी सी बात के लिए कितना टाईम वेस्ट किया बोलो तो ।
तभी वहां पर आदित्य और कृतिका कार लेकर पहूँचता है जिसे दैखकर अशोक खुश हो जाता है ।
काली आदित्य को दैखकर कहता है ---
काली :- ये बिन बुलाये मेहमान कहां ये टपक गया । मेरे इलाके में अगर कुत्ता भी भौंके ना, तो पहले मेरी इजाज़त लेता है । कौन है तु ।
तभी वही गुडां अपने साथी गुडें से कहता है --
गुडां :- मैने कहा था ना ये अपनी डॉयलॉग बाजी करते रह जाएगा और कोई आके इसे पेल कर चला जाएगा , पेलने वाला आ गया ।
आदित्य :- जली को आग कहते है और बुझी को राख कहते है ।
जली को आग कहते है और बुझी को आग कहते है ... और मैं इन दोनो को यहां से लेने आया हूँ ।
आदित्य उटपटांग शायरी सुनकर काली और बाकी सभी हैरान हो जाता है , काली अपना सर खुजाने लगता है ।
कृतिका कहती है --
कृतिका :- हें ... ये क्या था ।
आदित्य : - सॉरी पर मुझे सायरी नही आता ।
काली :- तो ले जा रे कौन मना कर रहा है , वैसे भी मै तो इन दोनो को तब से जाने के लिए बोल रहा हूँ ।
अशोक :- बेटा आदित्य इसके पास जानवी का सिग्नेचर किया हूआ पेपर है ।
आदित्य :- आप चितां मत करो पापा , मैं इससे वो पेपर भी लूगां और उस आदमी का नाम भी , जिसने इसे ये सब करने को कहा है ।
इतना बोलकर आदित्य उन सबको मारने लगता है और काली को भी तभी जानवी आदित्य को शक के नजर से दैखने लगती है और मन ही मन सौचती है --
" मैं जहां कहीं भी मुसीबत मे होता हूँ , ये आदित्य वही पहूँच जाता है , कही इन सबके पिछे आदित्य तो नही है । ताकि ये मेरा भरोसा जीत सके और मैं हमेशा के लिए विकास को छोड़कर इसके साथ रहूँ । क्योकी वैसे भी इसके पास ना ही काम है और ना ही पैसा । जिस कारण ये मेरा भरोसा जीत कर मेरे पैसो पर ऐश करना चाहता है । हां जानवी तु ठीक सौच रही है , ये सब आदित्य का ही खेल है , वो नही चाहता के मैं विकास के साथ रहूँ । अगर मैं विकास के साथ चली गई तो ये सड़क पर आ जाएगा ।
जानवी इतना सौच ही रही थी के तभी काली आदित्य के हाथ पर चाकु से वार करता है । जिससे आदित्य को चोंट लग जाती है और खुन बहने लगता है । आदित्य काली को बहोत मारता है और उससे वो पेपर ले लेता है जिसपर जानवी के सिग्नेचर थे । काली अपने आपको छुड़ाकर वहां से भाग जाता है ।
आदित्य जानवी के पास आता है और वो पेपर जानवी को देकर कहता है---
आदित्य :- तुम ठिक हो जानवी ।
जानवी गुस्से से कहती है --
जानवी :- तुमने ये सब ठिक नही किया आदित्य ।
जानवी की बात पर सभी हैरान हो जाता है , आदित्य हल्की मुस्कान के साथ कहता है -
आदित्य :- क्या ठिक नही किया जानवी ?
अशोक :- बेटा ये तुम क्या बोल रही हो ।
जानवी :- मैं बिल्कुल ठिक बोल रही हूँ पापा । ये जो कुछ भी हो रहा है , ये सब इसका कराया है ।
आदित्य :- क्या , ये तुम क्या बोल रही हो जानवी ? मैने , मैं ऐसा क्यों करुगां ।
अशोक :- तुम होश मे तो हो जानवी , जानती हो किससे क्या बोल रही हो ।
कृतिका :- जानवी तुम्हें कुछ गलतफहमी हूआ है । घर चलकर आराम से बात करते है ।
कृतिका जानवी का हाथ पकड़ती है तो जानवी हाथ छुड़ाते हूए कहती है --
जानवी :- हुह । घर कौन सा घर ।
कृतिका :- अपने घर , तुम्हारा और आदित्य का घर ।
जानवी :- वो घर अब मेरा नही है ।
अशोक :- ( चिल्लाकर ) जानवी ।
आदित्य :- नही पापा , उसे बोलने दिजिए, उसके मन मे जो कुछ भी है उसे कहने दिजिए, रोकिए मत , तुम जानवी क्या जान गयी हो तुम मेरे बारे मे ।
जानवी :- यही के ये जो हो रहा है , मेरे और पापा का किडनेप कराके पेपर पर सिग्नेचर लेना फिर आके हमे बचाना , और उस रात मुझे एसिड अटेक से बचाना , तुम ये सब इसिलिए कर रहे हो ना ताकि तुम हमारा भरोसा जीत सको ।
आदित्य :- पर मैं ऐसा क्यों करुगां ।
जानवी :- करेक्ट सभी को यही लगेगा के तुम ऐसा क्यों करोगे । पर मैं बताती हूँ के तुम ऐसा क्यो करोगे । पहले तो तुम ये सब करके मेरा भरोसा जीतोगे , ताकि मैं तुमसे प्यार कपने लगु और विकास को छोड़कर तुम्हारे साथ रहूँ । क्योकी तुम्हारे पास ना तो कोई काम है और ना ही पैसा । सड़क के भिखारी से भी बत्तर हो तुम । तुमने सौचा के ये सब करके मैं तुमसे प्यार करने लगूंगी और फिर मैं तुम्हारे साथ रहूगी और फिर तुम पुरी जिंदगी मेरे पैसो पर ऐश करो । पर तुम्हें क्या लगता है के ये सब करके तुम मुझे विकास से अलग कर दोगे ।
विकास का नाम सुनकर अशोक कहता है --
अशोक :- क्या कहा तुमने विकास , तुम अब भी उस विकास का नाम ले रही हो वो भी अपने पति के सामने , तु कैसी लड़की है जानवी ।
जानवी :- अब वो मेरा पति नही है ।
जानवी से इतना सुनकर अशोक हैरान हो जाता है अशोक गुस्से से जानवी के पास जाता है और कहता है --
अशोक :- क्या , क्या कहा तुने , आदित्य तेरा पति नही है , और वो शादी उसका कोई मायने नही है तेरे पास ।
जानवी :- मायने रहता पापा । अगर मैं इससे डिवोर्स ना लिया होता ।
डिवोर्स की बात सुनकर अशोक गहरा झटका लगता है ।
अशोक :- ये क्या बोल रही है तु बेटा । आदित्य जैसे लड़के से तुने डिवोर्स ले लिया । ये तुने क्या किया बेटा । उस लंफगे विकास के लिए तुने मुझे धोका दिया , आदित्य को धोका दिया । तुने तो आदित्य की जिंदगी ही बर्बाद कर दी बेटा ।
जानवी :- इसकी जिंदगी मैं क्यों बर्बाद करुँगी पापा , इसने खुद अपनी लालच के कारण अपनी बर्बाद किया है । पहले तो मैं भी इसके बातो मे आ गयी थी , इसके बारे मे सौचने लगी थी । फिर मुझे एहसास हूआ के ये , ये सब क्यों कर रहा है । अब मैं इस आदमी के साथ एक पल भी रहना नही चाहूंगी ।
आदित्य वहां पर चुप चाप खड़ा था , कृतिका जानवी से कहती है --
कृतिका :- बहोत घमंड है ना तुम्हें अपने पैसो पर , तुम्हें क्या लगता है के आदित्य तुम्हारे पैसो के लिए तुमसे शादी किया था । अरे तुम जैसे को तो यू आदित्य. ..
कृतिका और कुछ बोलती के आदित्य कृतिका को रौक लेता है और कहता है --
आदित्य :- जाने दो छोड़ो ना । वैसे भी शादी की पहली रात को ही सब खतम हो गया था । अब जानवी मेरे बारे मे क्या सौचती है उससे क्या ही फर्क पड़ता है । चलो घर चलो ।
इतना बोलतर आदित्य अशोक के पास जाता है और अशोक के सामने हाथ जौड़कर कहता है --
आदित्य :- जब से जानवी से शादी हूई है तबसे मैं आपको पापा बोलकर पुकारता हूँ । पापा , हो सके तो मुझे माफ कर देना ।
अशोक आदित्य का हाथ पकड़ कर कहता है --
अशोक :- बेटा क्यों मुझे शर्मिदां कर रहा है । माफी तो मुझे मांगनी चाहिए , ( आदित्य को पैर को छुने जाता है तो आदित्य अशोक का हाथ पकड़ लेता है )
आदित्य :- अरे पापा आप ये क्या कर रहे हो ?
अशोक :- छुने दे बेटा , तेरा पैर मुझे छुने दे , मैने तेरी जिंदगी बर्बाद कर दी । मैं सब जानता हूँ बेटा के तुम कौन हो ?
अशोक से इतना सुमकर आदित्य हैरान हो जाता है । अशोक फिर कहता है --
अशोक :- हां बेटा, मैं तुम्हारे बारे मे सब जानता हूँ । जिस दिन जानवी तु आदित्य को समझेगी उस दिन तु बहोत पछतायेगी बेटी बहोत ।
इतना बोलतर अशोक वहां से चला जाता है , जानवी भी अपना मुह बनाकर वहां से चली जाती है । कृतिका कहती है --
कृतिका :- तुमने मुझे चुप रहने को क्यो कहा , वरना आज उस घंमडी जानवी को उसकी असली औकात बता देती ।
आदित्य : - छोड़ना चल ।
कृतिका :- तु ऐसा क्यों है यार ।
इतना बोलकर दोनो घर चले जाता है , जहां पर त्रिपुरारी बेठा था । आदित्य और कृतिका को दैखकर कहता है --
तिरु :- अरे आ गए बेटा । सुबह से कॉल कर रहा हूँ ना तुम उठा रहे हो और ना जानवी । कहां थे अब तक तुम लोग और ये जानवी को क्या हो गया है । उसे कॉल करती हूँ तो कहती है के आजके बाद मुझे कॉल मत करना । क्य बात है आदि, तुम दोनो मे झगड़ा हूआ है क्या ?
कृतिका :- झगड़ा नही मामा जी , डिवोर्स हूआ है । आदित्य और जानवी का ।
तिरु ये सुनकर चोंक जाता है ।
तिरु :- क्या , डिवोर्स ! आदि ये कृतिका क्या बोल रही है । सुबह तक तो तुम दोनो ठिक थे पर ऐसे अचानक से क्या हो गया ।
कृतिका :- सुबह से कुछ नही हूआ । शादी की पहली रात को ही दोनो का डिवोर्स हो गया है ।
तिरु :- क्या ।
कृतिका तिरु को अब तक की सारी बात बोलकर सुनाती है और कहती है --
कृतिका :- मन तो कर रहा था मामा जी उसे वही पर उसकी औकात दिखा दूं , पर आदित्य ने मुझे रोक लिया ।
आदित्य :- छोड़ो ना , तुम भी ना वही बात को लेकर पड़ी हो ।
इतना बोलकर आदित्य वहां से चला जाता है । तभी रमेश और रश्मी आ जाता है ।
रमेश :- क्या हूआ कृतिका तुने फोन पे ये क्या कहा ।
कृतिका :- जो कहा सब सच कहा । उस जानवी को पैसो घंमड है और हमारे आदि को पैसो का लालची बता रही थी । बोल रही थी के आदि ने उसको साथ उसको पैसो के लिए शादी किया है । वो पागल औरत क्या जाने के हमारे आदि के लिए लड़कियों की लाईन लगती है ।
तिरु :- जानो दो जो भी हूआ , बाद मे वो लड़की पछताऐगी । खैर जो हूआ अच्छा नही हूआ ।
सुबह के 9 बज रहे थे कृतिका और रश्मि, सभी के नाश्ता करा रही थी , तभी मैन डोर की घंटी बचती है तो आदित्य कहता है --
आदित्य :- मैं दैखता हूँ ।
इतना बोलकर आदित्य उठकर दरवाजा खोलता है तो दैखता है के दरवाजे पर पुलिस खड़ी थी , जिसे देखकर आदि कहता है --
आदित्य : - जी इंस्पेक्टर सर बोलिए ।
आदि के मुह से इंस्पेक्टर का नाम सुनकर सभी दरवाजे के पास आ जाता है ।
इंस्पेक्टर :- आदित्य कौन है ?
आदित्य :- जी मैं ही आदित्य हूँ कहिए क्या बात है ?
इंस्पेक्टर :- आपके नाम का कंप्लेंन है आपको मेरे साथ थाने चलना होगा ।
कृतिका :- और ये कंप्लेन जानवी मेडम ने की है ।
इंस्पेक्टर :- जी , उन्ही का कंप्लेन है के आदित्य ने उनके और पापा को किडनेप किया और उससे पहले 16 तारिक की रात को उनपर एसिड से अटेक करवाया ।
Note :- aap sabko naye saal ki bahot - bahot shubhkamnaye , bhagwaan apko or apke parivar ko khus or swasth rakhe.
Jaisa ki meine kaha tha ke mei roj episode nhi la sakta kyunki ye app ka policy hai , to kuch sabd meine badaya hai pehle 1100 sabd ka ek episode aata tha , par ab 1900 sabd ya use jyada ayenge .
Jo mere har episode par apna pyara comments or review dete hai , ANTIMA JI , VAISHNAVI SHUKLA JI , JAYSHREE S HADSNI JI , MINA VADERA JI OR PAL JI . aap sabka bahot - bahot dhanyavaad ❤️. Mei apke review ya comment par reply nhi kar pa rha hu , pata nhi sayad kuch problem hogi app par , par jaise he problem solve hogi mei , jarur reply karunga .aap mujhe story ke bare mei jarur bataye , agar kuch apke man bhi hai to jarur boliyega , mei use story mei dalne ka kosis karunga .aap chaho to mujhe intagram par bhi message kar sakte ho:- sanatani_chiranjittewary.