Tere Mere Darmiyaan - 50 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 50

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तेरे मेरे दरमियान - 50

इंस्पेक्टर :- जी , उन्ही का कंप्लेन है के आदित्य ने उनके और पापा को किडनेप किया और उससे पहले 16 तारिक की रात को उनपर एसिड से अटेक करवाया ।

कृतिका :- सर वो लड़की एक नम्बर की फ्राड है धोकेबाज है । 

कृतिका इंस्पेक्टर को सब कुछ बोलतर सुनाती है और कहती है --

कृतिका :- सर अब आप ही बताओ , जो लड़का उसके हर कदम पर साथ रहा वो भला ये सब कैसे कर सकता है ।

इंस्पेक्टर :- देखिए मेडम , वो सब तो ठिक है पर अभी तो इसे हमारे साथ चलना ही पड़ेगा ।

कृतिका :- पर सर ..!

कृतिका इतना बोलती ही है के आदित्य उसे रोक कर कहता है --

आदित्य :- कृतिका सांत रहो , मुझे कुछ नही होगा ।

आदित्य अपने मामा जी की तरफ दैखता है और कहता है --

आदित्य : - मामा जी 

तिरु :- ठिक है भांजे ।

तिरु तुरंत अपने फैमेलि लॉयर प्रताप सिंह को फोन करता है जो भारत ते सबसे बड़े लॉयर है ।
तिरु :- सर ....!

तिरु सब बोलकर सुनाता है , प्रताप कहता है --

प्रताप :- ठिक है Don't worry . मैं अभी उन्हे लेकर आता हूँ ।

इधर पुलिय स्टेशन मे आदित्य को इंस्पेक्टर ने धक्के मारकर लॉकअप मे डाल देता है और एक पेपर लेकर आता है और कहता है --

इंस्पेक्टर :- ले अब चुप चाप इसपर साइन कर और अपना गुनाह कबूल कर ।

आदित्य :- अरे सर आपने तो अभी से मुझे मुजरिम बना दिया । बिना पूछताछ किये ही ।

इंसिपेक्टर :- तेरे जैसे दौ टके के आदमी को दैखकर ही ना पता चल जाता है के कौऩ क्या कर. सकता है ।

आदित्य :- आदमी दौ टके का हो या अरबपति हो दोनो है तो इंसान ही ।

इंस्पेकटर :- हां पर तु इसान नही गंदी नाली का किड़ा है साले । और उसे कैसे साफ करना है मुझे अच्छे से मालूम है ।

आदित्य :- तो फिर आप किस नाली के किड़ा हो ।

आदित्य की बात को सुनकर वो इंस्पेक्टर गुस्सा हो जाता है और आदित्य को मारने जाता है तो आदित्य उसका हाथ पकड़कर कहता है --

आदित्य :- तुम गलती कर रहे हो इंस्पेक्टर, तुम्हें शायद पता नही के मैं कोन हूँ ।

इंस्पेक्टर :- मुझे तुम्हारे बारे मे जानवी मेडम ने सब कुछ बता दिया है अब और कुछ जानने का बाकी है ही क्या ? चुप चाप इस पर साईन कर वरना मुझे और भी तरिके आते है ।

आदित्य :- पर इंस्पेक्टर मैने कोई किडनेप नही किया है तो साईन क्यों करु । आप पहले इस केश की जांच किजिये । बिना जांच किये आप मुझे मुजरिम कैसे साबित कर सकते है । 

आदित्य के इतना कहने के बाद वो इंस्पेकटर अपने साथी सिपाही को बुलाता है और आदित्य को पकड़कर मारने लगता है । 

आदित्य :- सर ये आप गलत कर रहे हो , आपको भारी किमत चुकानी पड़ेगी ।

इंस्पेक्टर ( मारते हूए ) :- साले मुझे धमकी देता है ।

इतना बोलकर और मारने लगता है , आदित्य अब बेहोशी के हालत मे था । तब इंस्पेक्टर सबको रोकता है और कहता है --

इंस्पेक्टर :- रुक जाओ । छोड़ो इसे , हम इसे बाद मे दैख लेगें ।

इतना बोलकर सभी बाहर आता है इंस्पेक्टर पानी पिने लगता है तभी उसका फोन बजता है , इंस्पेकटर दैखता है के जानवी का फोन था ।
इंस्पेक्टर :- हां मेडम बोलिए । 

जानवी :- कुछ कहा उसने ।

इंस्पेक्टर :- नही मेडम , पर आप चितां मत किजिये, मैं जल्द ही सब कुछ एक एक करके सारा सच उगलवा लूगां ।

जानवी :- आपने उसे मारा तो नही ना ।

इंस्पेकटर :- थोड़ा सा तो मारना पड़ेगा ना मेडम ।

जानवी :- ठिक है , जो करना है करो ।

इतना बोलकर जानवी फोन रख देती है । तो अशोक सब सुन लेता है और कहता है --

अशोक :- तु इतना निचे गिर जाएगी ये मैने कभी सौचा नही था जानवी । तुने उस अच्छे इंसान को पुलिस के हवाले कर दिया । जिसने तेरा साथ हर वक्त हर मुश्किल समय मे दिया है ।

जानवी :- पापा आप ऐसे लोगो को जानते नही हो । पहले मुझे भी आदित्य एक अच्छा इंसान लगता था । मुझसे भी उसकी बुराई सही नही जा रही थी । फिर मैने सौचा के यही क्यू । यही हर जगह क्यु । कोई और क्यू नही ।

अशोक :- वाह , तो इसका मतलब जो तेरा मदद करेगा तु उसके बारे मे यही सोचेगी ।

जानवी :- पापा आप...

अशोक जानवी की बात को काटते हूए कहता है --
अशोक :- तुझे जो करना है कर मैं जा रहा हूँ आदित्य को छुड़ाने । इतना बोलतर अशोक वहां से पुलिय स्टेशन की और निकल जाता है , जानवी भी अशोक को पुकारती हूई उसके पिछे चली जाती है --

जानवी :- रुकिए पापा । पापा ।

इधर पुलिय स्टेशन मे इंस्पेक्टर बैठा था तभी स्टेटस के बाहर बहोत सारी मंहगी गाड़ीयां रुकी जिसे दैखकर इंस्पेक्टर घबरा जाता है , तभी गाड़ी से विद्युत तिवारी , प्रताप सिंह और तिरु आता है उनलोगो के साथ कई बॉडिगार्ड भी थे जिनके हाथो मे लेटेस्ट गन था । प्रताप सिंह और विद्युत तिवारी को दैखकर इंस्पेक्टर की हालत खराब थी वो कांपते हूए कहता है --

इंस्पेक्टर :- प्रताप सर और विद्युत तिवारी । ये लोग यहां पर ।

इंस्पेक्टर उठकर दौड़कर जाता है और कहता है --

इंस्पेक्टर :- सर आप ( विद्युत ) यहां पर और प्रताप सर आप , भारत के सबसे बड़े लॉयर मेरे स्टेसन पर , क्या भाग्य है मेरे , आईए ना सर ।

विद्युत :- हम यहां तुमसे अपनी खातिर दारी कराने नही है ऑफिसर । आदित्य कहां है उसे जल्दी से ले कर आओ । 

प्रताप सिंह उसे रिहाई के सारे डॉक्युमेंट्स दे देते है और कहता है --

प्रताप :- तुम नही जानते के तुमने किसे अरेस्ट किया है वो भी बिना किसी सबूत के ।

इंस्पेक्टर :- पर सर आप आदित्य को कैसे जानते है । 

प्रताप :- तुम बस इतना जान लो के अगर तुमने आदित्य के साथ कोई बुरा सलूक किया , तो तुम्हारी वर्दी तो जाएगी ही , तुम्हें जैल मे सारी उम्र चक्का पिसवाउगां ।

इंस्पेक्टर ये सब सुनकर डर जाता है । उधर दो सिपाही आदित्य को पकड़ लाता है आदित्य लड़खड़ाता हूआ बाहर आता है , आदित्य , विद्युत और बाकी सबको दैखकर हल्की मुस्कान देता है और लड़खड़ाते हूए गिरने लगता है तो तिरु और विद्युत भागकर उसे पकड़ लेता है । विद्युत गुस्से से इंस्पेक्टर की तरफ दैखता है तो इंस्पेक्टर भागकर विद्युत के पैर पकड़ लेता है और कहता है --

इंस्पेक्टर :- हमे माफ कर दिजिये सर । मुझे पता नही था के आदित्य आपके कौन है । फिर कभी ऐसी गलती नही होगी ।

विद्युत :- तुने इसे हाथ कैसे लगाया । 

इतना बोलकर विद्युत इंस्पेक्टर को मारने जाता है तो प्रताप उसे रोककर कहता है । 

प्रताप नही विद्युत , ये पुलिय स्टेशन है , सांत रहो ।

विद्युत :- कासे सांत रहू प्रताप इसने मेरे बेटे पर हाथ कैसे उठाया , मैं इसे इस दुनिया से उठा दूगां ।

इतना बोलकर विद्युत अपने बॉडिगार्ड से गन छिनकर इंस्पेक्टर की और तान देता है । इंस्पेक्टर ये जानकर डर जाता है के आदित्य ही विद्युत तिवारी का छोटा बेटा है जिससे वो सबसे छुपा कर रखा था ।
प्रताप :- ये क्या ऑफिसर, तुमने इसके साथ एक पेसेवर मुजरिम की तरह ट्रीट कैसे कर सकते हो ? बिना पुछताछ के ही तुमने इसे इस तरह कैसे मार सकते हो । मैं तुम्हें छोड़ूगां नही ।

इतना बोलतर प्रताप मंत्री जी को फोन लगाता है और सब बोलकर सुनाता है । फिर तुरंत इंस्पेक्टर के S P सर का फोन आता है और कहता है --

S. P :- ये क्या कर रहे हो तुम ऑफिसर, क्या इसी काम के लिए तुमने वर्दी पहनी थी ताकी लोगो की दलाली कर सको । अगर अपनी नोकरी बचाना चाहते हो तो उनके पैर पकड़ लो वरना मुझे दोष मत देना ।

इतना बोलतर वो लोग आदित्य को वहां से ले जाने लगता है । तब आदित्य उस ऑफिसर से कहता है --

आदित्य :- ऑफिसर, मैने कहा था ना के मुझसे उलझना तुम्हें भारी पड़ेगा । तुम बस मेरा एक काम कर देना जानवी या किसीको भी मेरी सच्चाई मत बताना । 

इंस्पेक्टर :- मुझे माफ कर दिजिये सर , मुझसे गलती हो गई ।

आदित्य लंगड़ाते हूए तिरु को पकड़कर चलता है और गाड़ी मे बैठकर चला जाता है --

तभी वहां पर अशोक और जानवी दोनो आता है , स्टेसन पर मंहगी गाड़ी दैखकर अशोक समझ जाता है के कौन आया था । जानवी उन गाड़ीयो को दैखकर हैरान थी । 
अशोक और जानवी दोनो ही स्टेसन के अंदर जाता है , जानवी को दैखकर वो इंस्पेक्टर जानवी के पास जाता है और रोते हूए कहता है --

इंस्पेक्टर :- ये आपने क्या करवा दिया मुझसे मेडम ।

जानवी हैरान होकर कहती है -

जानवी :- मैने क्या करवाया और वो आदित्य कहां पर है । 

इंस्पेक्टर :- वो लोग उसे ले गए ।

जानवी ( गुस्से से ) :- कौन लोग । वो रमेश और कृतिका ।

इंस्पेक्टर ( हसते हूए ) :- आदित्य आपका पति था ना मेडम । हा हा ... क्या मेडम आपने किसे छोड़ दिया । एक अच्छे और सच्चे इंसान को आपने झुट मे ही फसाना चाहते थे । 

जानवी :- झुट नही था , मैने झुट नही कहा । आप जाओ और पकड़कर लाओ ।

इंस्पेक्टर ( हसते हूए ) :- हा हा .. आपको एक सलाह देता हूँ मेडम । मेरी नोकरी जाएगी के बचेगी ये तो आदित्य सर के हाथो पर ही है , पर आपने खुद अपनी लाइफ बर्बाद कर ली । और हां एक और बात उन लोगो से दूर रहिए । आप जितना आदित्य सर से दुर रहिएगा , आपके लिए उतना ही अच्छा होगा ।

इंस्पेक्टर से आदित्य के बारे ये सब सुनकर जानवी हैरान थी और मन ही मन सौच रही थी --

" ये ऑफिसर आदित्य को सर क्यों बोल रहा है , क्या सच मे मैने कोई गलती की है , क्या आदित्य सच मे बेगुनाह है । नही नही मुझसे गलती नही हो सकती । 

इतना सोचते हूए जानवी और अशोक दोनो वहां से चला जाता है ।

दुसरे दिन जानवी और विकास कॉफी सॉप मे बैठे थे । विकास जानवी से कहता है -

विकास :- मुझे तो पहले ही पता था वो आदित्य एक नम्बर का फ्रॉड है । मोनिका ने जो उसके बारे मे कहा था वो सही था । तुम्हें भी कई बार चेताया पर तुम नही मानी । 

जानवी :- मैं भी उसके अच्छाई के जाल मे फंस गई थी , मुझे लगा था के वो अच्छा आदमी है , पर फिर मैने सौचा के वो हर जगह क्यों पहूँच जाता है । ये सब उसकी चाल थी , ये अच्छा हूआ के समय रहते मैं समझ गयी वरना उसने तो पुरी प्लानिंग करके रखा था । 

विकास मन ही मन सौचता है --

"" ये जानवी कितनी बेवकूफ है , इसे नही पता के आदित्य से अलग होकर इसने मेरा कितना बड़ा काम कर दिया है । मेरा हर प्लानिंग पर वो आदित्य पानी फेर देता था , पर अब जानवी खुद मेरे जाल मे फंसने के लिए आ गयी है । इससे पहले फिर कुछ गलत हो मुझे इस जानवी से शादी की बात कर लेनी चाहिए । एक बार शादी हो गई तो मैं इससे पेपर पर सिग्नेचर करा ही लुगां ।""

जानवी :- क्या सौचने लगे विकास ?

विकास :- मैं वो सौच रहा था के हम दोनो को अलग करने के लिए लोगो ने कितना कोशिश किया पर दैखो फिर भी तुम मेरे पास हो , प्यार सच्चा हो तो उन्हें कोई अलग नही कर सकता ।

जानवी :- हां विकास , तुम सही बोल रहे हो ।

विकास :- जानवी , क्यों ना हम शादी कर ले !

To be continue....362